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163 नदियों में विसर्जित होगी अटल जी की अस्थियां, जानें 5 बड़े नेताओं की कहां गईं अस्थियां

Sun, 19 Aug 2018 08:47 AM IST
Madhukar Mishra
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atal ji asthi
हिंदू परंपरा के अनुसार दाह संस्कार के बाद अस्थियों को चुनकर कुछ दिनों बाद किसी पवित्र नदी अथवा समुद्र में विसर्जित किया जाता है। अमूमन लोग सबसे पावन मानी जाने वाली गंगा नदी में ही अस्थि विसर्जन की चाह रखते हैं क्योंकि लोगों की मान्यता है कि जिस गंगा को राजा भगीरथ ने अपने पुरखों को तारने के लिए कठिन तपस्या कर पृथ्वी पर लाए थे, उसमें अस्थि विसर्जन करने से मृतक की आत्मा भी जन्म मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करती है। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों को भी 19 अगस्त 2018 को हरिद्वार में गंगा में प्रवाहित किया जाएगा। आइए जानते हैं कि देश की तमाम बड़ी शख्सियतों के दाह संस्कार के बाद उनकी अस्थियों को कहां और कैसे प्रवाहित किया गया —
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gandhi asthi
महात्मा गांधी की अस्थियां
अमूमन दाह संस्कार के पश्चात अस्थियों को नदियों या सागर में विसर्जित कर दिया जाता है लेकिन महात्मा गांधी की अस्थियों को कई कलशों में भरकर रखा गया और भारत एवं दुनिया में बसे उनके विभिन्न अनुयायियों को सौंप दिया गया ताकि वे उनके स्मृति अवशेष रख सकें। बापू की अस्थियों का एक भाग १९४८ में ही उनके दाह संस्कार के पश्चात इलाहाबाद के पवित्र संगम पर विसर्जित कर दिया गया था। इसके पश्चात उनके अन्य भाग को समय-समय पर नदियों और समुद्र में प्रवाहित किया गया। मसलन, १९९७ में गांधी जी के पोते तुषार गांधी ने उनकी अस्थियों के विभिन्न कलशों में से एक को संगम में प्रवाहित किया था। वहीं 2010 में महात्मा गांधी की पुण्य तिथि के मौके पर उनके पारिवारिक मित्र द्वारा संरक्षित कर रखी गयी अस्थियों को दक्षिण अफ्रीका के तट पर हिन्द महासागर में विसर्जित किया गया था।
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nehru asthi
नेहरू की अस्थियां 
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने अपनी अस्थियों को लेकर पहले ही वसीयत कर दी थी, जिसमें उन्होंने लिखा कि — "मेरी अस्थियों का एक छोटा भाग कल कल बहती गंगा में प्रवाहित करवा देना एवं अस्थियों का कोई हिस्सा संरक्षित मत करना। अस्थियों का बचा हुआ बड़ा हिस्सा ऊपर हवा में ले जाकर खेतों में बिखराव करवाना जहां भारत के अन्नदाता अन्न उगाते हैं, ताकि मेरी अस्थियां भारत की धूल मिट्टी के साथ मिलकर भारत का एक अभिन्न भाग बन सकें।"

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neta ji asthiyan
सुभाष चंद्र बोस की अस्थियां
भारत की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले भारत हिंद फौज के दिवंगत नेता सुभाष चंद्र बोस की अस्थियां सितंबर, 1945 से टोक्यो के रेंकोजी मंदिर में रखी हुई हैं। माना जाता है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान में एक हवाई दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु हो गई थी।
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indira asthi
इंदिरा गांधी की अस्थियां
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के देहांत के पश्चात उनकी अस्थियों को प्रयाग के संगम में विसर्जित किया गया था जबकि उसका कुछ भाग विसर्जित करने के लिए राजीव गांधी ने उत्तराखंड का गंगोत्री धाम चुना था। राजीव गांधी ने उनकी अस्थियों को हेलीकॉप्टर से यहां विसर्जित किया था। 
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atal asthi
अटल जी की अस्थियां
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दाह संस्कार के पश्चात अब उनकी अस्थियों को कई भाग में कई नदियों में विसर्जित किया जाएगा। सबसे पहले 19 अगस्त 2018 को हरिद्वार के हरि की पौड़ी घाट पर विसर्जित किया जाएगा। उसके बाद अटल जी की अस्थियों को अन्य नदियों में भी विसर्जित किया जाएगा। अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियां राज्य के 75 जिलों की सभी 163 नदियों में विसर्जित की जाएंगी। 
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