अक्षय तृतीया 18 अप्रैल को है और इस दिन को पूरे साल का सबसे शुभ दिन मानते हैं। आगे बताई गई सही पूजन विधि से आप धन प्राप्त कर सकते हैं...
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ज्योतिषाचार्य सतीश शर्मा
- फोटो : amarujala
वैदिक ज्योतिषाचार्य सतीश शर्मा ने बताया कि अक्षय तृतीया तिथि का प्रारंभ मंगलवार 17 अप्रैल की रात्रि 3.45 बजे से शुरू होगा। 18 अप्रैल बुधवार की रात्रि 1.45 बजे पर समाप्त हो रहा है।
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snowfall badrinath
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भविष्य पुराण के अनुसार त्रेता युग का प्रारंभ भी इसी दिन हुआ था। इसी दिन बदरीनाथ धाम में नर-नारायण का अवतार हुआ था। सूर्य सिद्धांत ग्रंथ में ऐसा वर्णन है कि कृतिका नक्षत्र के प्रथम चरण में मेष राशि में सूर्य के होने पर सतयुग का प्रारंभ हुआ।
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राशिचक्र
18 अप्रैल को सूर्योदय के समय सूर्य मेष राशि में है। कृतिका नक्षत्र के प्रथम चरण में है और सूर्य मेष राशि में हैं। ऐसा संयोग सैकड़ों वर्ष बाद आता है। कृतिका नक्षत्र के प्रथम चरण में सूर्य मेष राशि में होने के कारण फलदायिनी योग बन रहा है।
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snan
इस दिन पिंड के बिना भी श्राद्ध करने का विधान है। गंगा और तीर्थ स्नान का विशेष महत्व है। इसलिए जल से भरा कलश, पंखा, जूता, भूमि और गोदान का महत्व है।
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अक्षय तृतीया को गंगा स्नान करना पुण्यकारी माना गया है। जिसके कुंडली में पितर दोष है, वे पितरों का पिंडदान, तर्पण कर सकते हैं। अक्षय तृतीया को सोना खरीदना, जमीन खरीदना, गृह प्रवेश, नया व्यापार करना, तीर्थयात्रा बहुत ही शुभ माना है।
पूजन विधि:
अक्षय तृतीया के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का पूजन करें।लक्ष्मी नारायण की पूजा सफेद कमल अथवा सफेद गुलाब या पीले गुलाब से करना चाहिये। नैवेद्य में जौ या गेहूं का सत्तू, ककड़ी और चने की दाल अर्पित की जाती है। इसके बाद फल, फूल, बर्त तथा वस्त्र आदि ब्राह्मणों को दान के रूप में दिये जाते हैं। इस दिन ब्राह्मण को भोजन करवाएं।