अक्षय तृतीया को शास्त्रों में बड़ा ही महत्व दिया गया है। आइये जानें वह नौ बातों जो अक्षय तृतीया के दिन हुए जिसने इस दिन को बनाया है बहुत ही शुभ और खास।
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नौ बातें जो अक्षय तृतीया को बनाते हैं सबसे खास
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अक्षय तृतीया को युगादि तिथि के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था।
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अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु ने नर और नारायण के रूप में अवतार लिया था। नर नारायण ने बद्रीनाथ में तपस्या किया और इसे तीर्थ स्थान बनाया। यही नर नारायण अगले जन्म में अर्जुन और कृष्ण हुए। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं यह बात कही है। अक्षय तृतीया के दिन ही विष्णु का एक अन्य अवतार हयग्रीव के रूप में हुआ था जिनका सिर अश्व का था।
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माना जाता है कि महाभारत के युद्ध का समापन भी अक्षय तृतीया के दिन हुआ और पाण्डवों को हस्तिनापुर का साम्राज्य प्राप्त हुआ।
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शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण का युग द्वापर का अंत भी अक्षय तृतीया के दिन हुआ था।
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ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु के चरणों से निकली और शिव की जटा में वास करने वाली मां गंगा का धरती प आगमन भी अक्षय तृतीया के दिन हुआ।
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माना जाता है कि माहाभारत महाकाव्य की रचना बद्रीनाथ से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर माना गांव में गणेश गुफा में हुआ था। महर्षि वेद व्यास एवं श्रीगणेश ने अक्षय तृतीया के दिन ही इस महाकाव्य का लेखन कार्य शुरू किया था।
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चार धामों में प्रमुख बद्रीनाथ की यात्रा का आरंभ अक्षय तृतीया के दिन से शुरू होता है। अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलते हैं उसके अगले दिन केदारनाथ और फिर बद्रीनाथ के कपाट खुलते हैं।