व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव का ध्यान करें और दिन की शुरुआत भक्ति भाव से करें।
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प्रदोष व्रत की पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले स्नान करें और शरीर को शुद्ध करें।
- स्वच्छ, साफ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें ताकि मन शांत और पवित्र रहे।
- व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव का ध्यान करें और दिन की शुरुआत भक्ति भाव से करें।
- पूरे दिन सात्विक आचरण का पालन करें और मन को शांत बनाए रखें।
- भगवान शिव या शिवलिंग की विधिवत पूजा की तैयारी करें और पूजा स्थल को साफ करें।
- शिवलिंग पर श्रद्धा भाव से बेलपत्र अर्पित करें, जो अत्यंत शुभ माना जाता है।
- जल, दूध, दही, शहद, घी, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर विधिपूर्वक अभिषेक करें।
- पूजा के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और मन को एकाग्र रखें।
- दिनभर व्रत का पालन करते हुए अनावश्यक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- शाम के प्रदोष काल में दोबारा स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पुनः भगवान शिव की पूजा करें और शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
- भगवान शिव को फल, मिठाई और अन्य सात्विक भोग अर्पित करें।
- गुरु प्रदोष व्रत की कथा को ध्यानपूर्वक और श्रद्धा के साथ सुनें या पढ़ें।
- अंत में भगवान शिव की आरती करें और पूजा का समापन करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।