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Adhik Maas 2026: कब से शुरू होगा अधिक मास? इस पवित्र महीने में करें ये शुभ काम

Sat, 11 Apr 2026 08:29 PM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Purushottam Maas 2026: हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है जिसे अधिक मास कहा जाता है।  इस महीने को धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।   इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है।  धर्म ग्रंथों और पुराणों में इस मास से जुड़े कई नियम, परंपराएं और मान्यताएं बताई गई हैं।
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अधिक मास - फोटो : amar ujala
Jyeshtha Adhik Maas Date: हिंदू पंचांग में भी अंग्रेजी कैलेंडर की तरह 12 महीने होते हैं।  हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है जिसे अधिक मास कहा जाता है।  इस महीने को धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है।  धर्म ग्रंथों और पुराणों में इस मास से जुड़े कई नियम, परंपराएं और मान्यताएं बताई गई हैं।  साल 2026 में ज्येष्ठ माह के साथ अधिक मास का संयोग बन रहा है, जिसे खास और शुभ माना जा रहा है।  इस दौरान पूजा पाठ दान और आध्यात्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं कब से कब तक रहेगा यह अधिक मास और इन दिनों क्या उपाय करने चाहिए। 
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इस बार ज्येष्ठ मास का अधिक मास 17 मई से शुरू होगा। - फोटो : Adobe Stock
कब से शुरू होगा ज्येष्ठ माह का अधिक मास?
 इस बार ज्येष्ठ मास का अधिक मास 17 मई, रविवार से शुरू होगा जो 15 जून सोमवार तक रहेगा। 
 
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क्यों आता है अधिक मास? - फोटो : Adobe Stock
क्यों आता है अधिक मास? 
अधिक मास इसलिए आता है क्योंकि चंद्र और सौर वर्ष के समय में अंतर होता है।  चंद्रमा के अनुसार साल लगभग 355 दिनों का होता है, जबकि सूर्य के अनुसार साल 365 दिनों का होता है।  इस तरह हर साल करीब 10 दिनों का अंतर बन जाता है।  इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है जिसे अधिक मास कहा जाता है। 

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भगवान विष्णु का एक नाम पुरुषोत्तम भी है। - फोटो : Adobe Stock
अधिक मास को क्यों कहते हैं पुरुषोत्तम मास? 
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस महीने के अधिपति भगवान विष्णु माने जाते हैं। भगवान विष्णु का एक नाम पुरुषोत्तम भी है।  इसी कारण इस मास को यह नाम दिया गया है।  इस पूरे महीने में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। लोग उनकी कृपा पाने के लिए श्रीमद्भागवत की कथा सुनते हैं भक्ति और धार्मिक कार्य करते हैं।  साथ ही इस मास से जुड़ी कई मान्यताएं इसे और भी पवित्र और विशेष बनाती हैं। 
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अधिक मास में व्रत रखना और सात्विक भोजन करना विशेष महत्व रखता है। - फोटो : adobe stock
अधिक मास करें ये उपाय 
  • अधिक मास में तीर्थ यात्रा करना बहुत शुभ माना जाता है । विशेष रूप से पवित्र नदियों में स्नान और मंदिरों में सेवा करने से पुण्य मिलता है ।यदि दूर नहीं जा सकते तो आसपास के किसी धार्मिक स्थान पर स्नान और पूजा करना भी लाभदायक होता है।
  • इस मास में भगवान विष्णु और उनके अवतार श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व होता है। नियमित रूप से पूजा पाठ कथा और भजन करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। सुख-समृद्धि बढ़ती है।
  • घर के मंदिर में भगवान विष्णु या उनके प्रतीक के सामने घी का दीपक लगातार जलाना शुभ माना जाता है ।इससे नकारात्मकता दूर होती है और घर में सुख शांति बनी रहती है।
  • इस महीने गीता, भागवत और विष्णु से जुड़े ग्रंथों का पाठ करना बहुत फलदायी माना जाता है। इससे मन शांत होता है और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है।
  • अधिक मास में व्रत रखना और सात्विक भोजन करना विशेष महत्व रखता है। संयमित आहार और अनुशासित जीवन से मानसिक शांति मिलती है । आध्यात्मिक उन्नति होती है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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