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Achala Saptami 2023: आज रखा जाएगाअचला सप्तमी का व्रत, इस विधि से करें पूजा, सूर्य देव होंगे प्रसन्न

Sat, 28 Jan 2023 12:21 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
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अचला सप्तमी व्रत का महत्व
Achala Saptami 2023: आज अचला सप्तमी है। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को अचला सप्तमी मनाते हैं। अचला सप्तमी को रथ सप्तमी, भानु सप्तमी और आरोग्य सप्तमी के नाम से भी जानते हैं। इस दिन सूर्य देव की पूजा करते हैं और उनको जल का अर्घ्य देते हैं। मान्यता है कि इस दिन अगर भक्त पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ पूजा करते हैं तो सूर्यदेव की कृपा से रोग दूर होता है, धन-धान्य में वृद्धि होती है। मान्यता है कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को सूर्य देव अपने सात घोड़े वाले रथ पर सवार होकर प्रकट हुए थे और पूरी सृष्टि को प्रकाशित किया था। जिस कारण से ही हर साल माघ मास ही शुक्ल सप्तमी को अचला सप्तमी या सूर्य जयंती के रूप में मनाया जाता है। आइए जानते हैं अचला सप्तमी की तिथि, महत्व और पूजा विधि के बारे में।
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अचला सप्तमी व्रत का महत्व
अचला सप्तमी तिथि 
सप्तमी तिथि प्रारंभ : 27 जनवरी 2023 दिन शुक्रवार,प्रातः  09:10 पर 
सप्तमी तिथि समाप्त :28 जनवरी 2023 दिन शनिवार, प्रातः 08:43 पर
अचला सप्तमी का स्नान मुहूर्त: प्रातः 05:29 मिनट से 07:14 मिनट तक  
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अचला सप्तमी व्रत का महत्व
अचला सप्तमी का महत्व 
अचला सप्तमी के दिन गंगा स्नान करने या पानी में गंगाजल डालकर स्नान करने और भगवान सूर्य की आराधना करने से जाने-अनजाने, मन, वचन पिछले जन्म के सात पापों से मुक्ति मिलती है। इस व्रत की विधि और महत्व के बारे में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था। इस व्रत को करने से घर-परिवार में हमेशा खुशियां बनी रहती हैं और हर संकट का निवारण अपने आप हो जाता है। 
 

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अचला सप्तमी व्रत का महत्व
अचला सप्तमी व्रत विधि 
  • ब्रह्ममुहूर्त में उठकर नदी या सरोवर पर जाकर स्नान करें। 
  • अब तांबे के दीपक में तिल का तेल डालकर जलाएं और इस दीपक को सिर पर रखकर सूर्यदेव का ध्यान करें। 
  • ध्यान के बाद इस दीपक को नदी में प्रवाहित करें। 
  • अब फूल, धूप, दीप, नैवेद्य तथा वस्त्र आदि से विधि-विधान पूर्वक भगवान सूर्य की पूजा कर- स्वस्थानं गम्यताम, का उच्चारण करें। 
  • अब मिट्टी के एक बर्तन जैसे मटकी में गुड़ और घी सहित तिल का चूर्ण रख दें। इसे लाल कपड़े से ढंककर योग्य ब्राह्मण को दान कर दें।
  • फिर सूर्यदेव से प्रार्थना करते समय इस मंत्र का उच्चारण करें "सपुत्रपशुभृत्याय मेर्कोयं प्रीयताम्" (पुत्र, पशु, भृत्य समन्वित  भगवान सूर्य मेरे ऊपर प्रसन्न हो जाएं) । 
  • इस प्रार्थना के बाद ब्राह्मण को वस्त्र, तिल, गाय और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। 
  • अंत में ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत का समापन करें।
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अचला सप्तमी व्रत का महत्व
ध्यान मंत्र 
ध्यान करते समय इस मंत्र का उच्चारण करें- 
नमस्ते रुद्ररूपाय रसानाम्पतये नम:।
वरुणाय नमस्तेस्तु हरिवास नमोस्तु ते।। 
यावज्जन्म कृतं पापं मया जन्मसु सप्तसु।
तन्मे रोगं च शोकं च माकरी हन्तु सप्तमी।
जननी सर्वभूतानां सप्तमी सप्तसप्तिके।
सर्वव्याधिहरे देवि नमस्ते रविमण्डले।।
 
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