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जब शनिदेव को राजा दशरथ ने ललकारा था, फिर भी शनि ने क्यों दिया ऐसा वरदान

Sat, 07 Apr 2018 03:43 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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शनि न्याय के देवता कहलाए जाते हैं। अच्छे कर्म करने पर अच्छा और बुरा कर्म करने पर बुरा फल देते हैं। पद्म पुराण के अनुसार स्वयं शनि देव ने स्वयं राजा दशरथ को अपनी पूजा करने की विधि बताई थी।
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पद्म पुराण के अनुसार एक कथा है। अयोध्या के ज्योतिषियों ने राजा दशरथ का बताया की शनिदेव कृत्तिका नक्षत्र के अंत में पहुंच गए हैं और रोहिणी नक्षत्र को पार करके आगे बढ़ेंगे। ज्योतिषों ने इसके बारे में राजा दशरथ को चेताया कि ऐसा होने से 12 सालों तक भयंकर अकाल पड़ेगा और लोग पानी को तरसेंगे।
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ज्योतिषियों की बात सुनकर राजा दशरथ शनिदेव से युद्ध करने नक्षत्र मंडल में युद्ध करने पहुंच गए। राजा दशरथ का साहस देखकर शनिदेव प्रसन्न हो गए और वरदान मांगने को कहा।

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इसके बाद राजा दशरथ ने शनिदेव से वरदान के रूप में  कहा कि जब तक सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी है आप रोहिणी नक्षत्र का भेदन ना करें। इसके बाद शनिदेव ने राजा दशरथ को वरदान प्रदान किया।
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इसके अलावा राजा दशरथ ने शनिदेव से कहा कि आप किसी भी प्राणी को पीड़ा ना दें। इसके जवाब में शनिदेव ने कहा जो भी विधि विधान से मेरी पूजा करेगा उसे कभी कष्ट नहीं दूंगा। 
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