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ग्रहों की होती हैं पांच अवस्थाएं, मनुष्य के स्वभाव पर होता है इनका असर

Tue, 30 Mar 2021 12:25 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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ग्रह
पृथ्वी पर जन्म लेने वाले प्रत्येक जीव की एक आयु होती जिसमें वह पांच अवस्थाओं से गुजरता है, लेकिन क्या आपको पता है कि मनुष्य और पशु-पक्षियों की भांति ज्योतिष में ग्रहों की भी आयु बताई गई है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार किसी भी राशि में प्रत्येक ग्रह की एक आयु होती हैै। जिसमें मनुष्य के जीवन की तरह ग्रहों की भी पांच अवस्थाएं बाल्यावस्था, किशोरावस्था, यौवनावस्था, प्रौढ़ावस्था, वृद्धावस्था होती है। यह अवस्थाएं राशि में उसके अंश के अनुसार उपस्थिति से तय की जाती हैं। प्रत्येक ग्रह अपनी अवस्था के अनुसार फल प्रदान करते हैं और इसका प्रभाव मनुष्य के स्वभाव पर भी पड़ता है।
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ग्रह नक्षत्र
कैसे तय की जाती हैं ग्रहों की अवस्थाएं 
ज्योतिष के अनुसार संपूर्ण आकाश मंडल को 360 अंश का मानकर उसमें राशि चक्र की 12 राशियों को स्थित किया गया है। इस प्रकार प्रत्येक राशि को 30 अंश प्राप्त होते हैं। प्रत्येक ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में भ्रमण करता है, इस तरह से हर ग्रह किसी भी राशि में अधिकतम 30 अंश तक भ्रमण कर सकता है। इसमें प्रत्येक अवस्था को 6 अंश माना जाता है और इसी तरह से 6×30 के अनुसार ग्रहों की पांच अवस्थाएं होती हैं। तो चलिए जानते हैं कि किस अवस्था का क्या होता है फल।
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planet
ग्रह की बाल्यावस्था का फल
जब कोई ग्रह किसी जातक की राशि में बालयावस्था में होता है तो वह सूक्ष्म फल प्रदान करता है। ग्रह की बाल्यावस्था की स्थिति में मनुष्य का स्वभाव चंचल होता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ग्रह की किशोरावस्था का फल
जब कोई ग्रह कुमार अवस्था या किशोरावस्था में होता है तो उस समय मनुष्य किसी भी जिम्मेदारी का निर्वहन सही प्रकार से नहीं कर पाता है या यूं कहें कि ग्रह की यह अवस्था व्यक्ति को गैर जिम्मेदार बनाती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ग्रह की युवावस्था का फल
किसी भी ग्रह की युवावस्था मनुष्य को ऊर्जावान और कार्यशील बनाती है। इस अवस्था के कारण व्यक्ति ऊर्जा से भरपूर रहता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ग्रह की प्रोढ़ावस्था का फल
जब कोई ग्रह प्रोढ़ावस्था में होता है तो जातक का स्वभाव धीर-गंभीर हो जाता है। वह अपने कार्यों के प्रति परिपक्व होता है।
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ग्रह नक्षत्र
ग्रह की वृद्धावस्था का फल
किसी भी ग्रह की वृद्धावस्था होने पर वह जातक के स्वभाव में गंभीरता आती है, परंतु इस समय व्यक्ति में शक्ति की कमी होती है। मृत अवस्था के ग्रह कोई फल प्रदान नहीं करता है।
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