पुराणों में किसी भी देवी-देवता की खण्डित मूर्ति की पूजा करना वर्जित माना जाता है। लेकिन देश में एक ऐसा मंदिर है जहां पर एक शिवलिंग के दो टुकड़ो की पूजा की जाती है। ऐसा शिवलिंग झारखंड के गोइलकेरा में स्थित है जहां पर पिछले 150 सालों से इस शिवलिंग की पूजा की जाती है। दरअसल इस शिवलिंग के खण्डित होने के पीछे एक अनोखी कथा है।
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आजादी के पहले झारखंड के इस क्षेत्र में रेल लाइन के बिछाने का काम चल रहा था तो खुदाई के दौरान एक शिवलिंग निकला। तब वहां के मजूदरों ने खुदाई का काम बंद कर दिया।
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तब वहां पर मौजूद अंग्रेज इंजीनियर ने शिवलिंग को केवल एक पत्थर मनाते हुए शिवलिंग पर प्रहार करके उसको दो टुकड़ों में कर दिया। लेकिन शाम को वापस लौटते हुए उसकी रास्ते में ही मौत हो गई।
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इस घटना के बाद मजदूरों और ग्रामीणों ने रेलवे लाइन की खुराई दूसरी तरफ से करने की मांग की। पहले तो अंग्रेज अधिकारी नहीं माने। लेकिन बाद में आस्था की आगे झुककर रेलवे लाइन की दिशा को बदल दिया।
आज भी जहां खुदाई में शिवलिंग निकला था आज वहां देवशाल मंदिर है और शिवलिंग के खंडित शिवलिंग मंदिर के गर्भगृह में स्थापित है। जबकि शिवलिंग का दूसरा टुकड़ा वहां से दो किलोमीटर दूर रतनबुर पहाड़ी पर है।