Rakhi Religious Significance: 28 अगस्त 2026 को चंद्र ग्रहण के साये के बीच रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह त्योहार केवल एक धागा बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि बहन द्वारा भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना का पवित्र संकल्प है। ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, भाई की राशि और शुभ धार्मिक प्रतीकों के आधार पर राखी का चयन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य लाता है।
समय के साथ राखी का बदलता स्वरूप
रक्षासूत्र की यह परंपरा समय के साथ काफी आधुनिक हुई है:
सूत और मौली: शुरुआत में केवल साधारण सूत का धागा या मौली (कलावा) बांधा जाता था।
नाड़ा और फूंदा: इसके बाद नाड़े और सूती धागों में बने रंग-बिरंगे फूंदों का दौर आया।
फोम और वेलवेट: समय बदला तो रेशमी धागे पर फोम और वेलवेट से बने फूलों वाली राखियाँ चलन में आईं।
आधुनिक और फैंसी डिजाइन्स: वर्तमान में ब्रेसलेट, ज़री, क्रिस्टल और कीमती धातुओं की राखियों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है।