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बातचीत करते समय न करें ये गलतियां, होता है बड़ा नुकसान

Thu, 11 Jan 2018 10:33 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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धर्मशास्‍त्रों में वाणी  संयम पर बल देते हुए उसके दोषों में बारे में भी बताया गया है। शास्‍त्रों के अनुसार वाणी आपका फायदा भी करवा सकती है तो नुकसान भी करवा सकती है। मनुस्मृति  में वाणी में कठोरता लाना, परनिंदा करना, व्यर्थ की बातें बनाना और झूठ बोलने को वाणी के चार दोष बताए गए है। 

     पारुष्यमनृतं चैव पैशुन्यं चापि सर्वशः। असंबद्ध प्रलापश्च वांग्मयं स्याच्चतुर्विधम्। 
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कहा जाता है अगर लोगों भक्ति रस में तृप्त होने की जगह पर भी दूसरों की बुराई करने में पीछे नहीं रहते है और हमेशा दूसरों में दोष ही देखते हैं, ऐसे लोग पैशुन दोषी होते हैं।
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धर्मशास्त्रों में पंचविध चांडालों में पैशुनयुक्त पुरुष को भी एक प्रकार का चांडाल माना गया है। एक संस्कृत श्लोक में बताया गया है कि दूसरे व्यक्ति में दोष देखने वाला, दूसरों के अवगुणों का वर्णन करने वाला, किए गए उपकार को याद न रखने वाला और क्रोध को मन में रखने वाला व्यक्ति चांडाल की श्रेणी में आता है।
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पैशुन दोष को वाणी के तप द्वारा जीतने की प्रेरणा देते हुए महर्षि कहते हैं, उद्वेग से रहित वाणी का उच्चारण, सत्य, प्रिय और हितकर वचन बोलना, अनर्गल बातचीत में समय व्यर्थ न करके सत्साहित्य का अध्ययन करना एवं भगवन्नाम का कीर्तन करना वाणी का तप कहलाता है। अतः वाणी से प्रत्येक शब्द सोच-समझकर निकालने में ही लाभ होता है।
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