ऑटो या ट्रक पर लिखी शायरी 'दूसरों की ऐश देखकर हैरान न हो, खुदा तुझे भी देगा परेशान न हो' आपने पढ़ी तो होगी ही। इस शायरी में एक गहरा रहस्य छुपा है जो दार्शनिक और परामनोविज्ञान की दृष्टि से समझा जा सकता है। यह उम्मीद की एक रोशनी दिखाती जो बताती है कि आप कभी न कभी अमीर बनेंगे तो यह बात पूरी तरह सही है। आप भले ही गरीब हों लेकिन यह जरुरी नहीं कि आप हमेशा गरीब ही रहेंगे या जो व्यक्ति आज अमीर है वह कल भी अमीर रहेगा।
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आत्मा का सफर यूं चलता रहता है
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परामनोवैज्ञानिक
सृष्टि में ऐसा नियम है कि कुछ भी स्थायी नहीं होता है इसलिए आप हमेशा अपनी सोच और बुद्धि को उस दिशा में लगाए रखें जो आप बनना चाहते हैं क्योंकि आप जो कुछ भी हैं या जो कुछ बनना चाहते हैं उसके लिए कोई दूसरा नहीं आप स्वयं जिम्मेदार होते हैं। वेदांत दर्शन और गीता में कहा गया है कि आत्मा नित्य और शाश्वत है इसका अंत नहीं होता है। यह एक शरीर को त्यागता है तो अपने पुराने शरीर के अनुभव और ज्ञान को समेट कर अगले सफर पर यानी शरीर की तलाश में चल पड़ता है।
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अगले जन्म का आधार
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परामनोवैज्ञानिक
कई बार ऐसी घटनाएं सुनने को मिलती है कि छोटे से बड़े गणित में बड़े-बड़े ज्ञानियों को टक्कर देते हैं, कोई उल्पायु में संगीत का ज्ञाता बना जाता है। पाश्चात्य वैज्ञानिक मानते हैं कि दरअसल ऐसा इसलिए संभव होता है कि उनके अवचेतन मन में पूर्व जन्म की स्मृति जग उठती है। यानी व्यक्ति के पूर्वजन्म के अनुभव, ज्ञान और संस्कार व्यक्ति के अगले जन्म का आधार बनती हैं।
इस तरह तय कीजिए अगले जन्म में क्या बनेंगे
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परामनोवैज्ञानिक
पुराणों में बताया गया है कि मृत्यु के समय जिस व्यक्ति की जैसी भावना रहती है उसी के अनुसार उसे नया शरीर मिलता है। इसलिए अगर आप इस जन्म में गरीब हैं तो अपनी बुद्धि और सोच को एक अमीर की तरह रखिए और अपने अंदर अमीर बनने की चाहत को बनाए रखिए। आपकी चाहत आपको अमीर बनाएगी इसी तरह अगर आप गायक, चित्रकार या व्यवसायी बनना चाहते हैं तो अपनी बुद्ध उसी में लगाइये।
भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है ' यं यं वापि स्मरण भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम। तं तमेवैति सदा तद्भावभावितः।। यानी जीवितावस्था में जो वासना अत्यधिक प्रबल होगी वह मृत्युकाल में अव्याहत रहती है। उस वासना के अनुरूप ही हमारा अगला जीवन निर्धारित होता है। कहने का मतलब यह है कि हम भविष्य में कौन सा रूप धारण करेंगे यह इससे जाना जा सकता है। हम अपने विचार, अपने धर्म एवं अपनी इच्छाओं के द्वारा ही आने वाले जीवन का निर्माण करते हैं।