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जीते ही नहीं मरने के बाद भी फूलन ने डराया, ऐसे

Wed, 10 Aug 2016 12:35 PM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिट, अमर उजाला, दिल्ली।
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फूलन देवी
'फूलन' कभी इस नाम से चंबल का जर्रा जर्रा थर्राता था। फूलन का जलवा ऐसा था क‌ि डाकूओं ने देवी कहना शुरू द‌िया और फूलन बन गई फूलन देवी और हर तरफ इनके नाम के चर्चे होने लगे। संसद में भी फूलन का मामला गूंजने लगा।  पुलिस ने इन्हें पकड़ने की काफी कोशिश की लेकिन हर बार नाकाम रही
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जीते ही नहीं मरने के भी फूलन ने डराया, ऐसे

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फूलन देवी
फूलन के जीवन का सबसे ऐत‌िहास‌िक मोड़ लेकर आया साल 1983। इंदिरा गांधी की सरकार ने जब फूलन देवी से समझौता किया कि उन्‍हें मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा, तब फूलन ने अपने दस हजार समर्थकों के सा‌थ आत्मसमर्पण कर दिया।
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फूलन देवी - फोटो : getty images
लेक‌िन डकैती और हत्या के जुर्म में फूलन को 11 साल तक जेल में गुजारना पड़ा। 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार इन्हें रिहा कर दिया। और आया फूलन की ज‌िंदगी में क्रांत‌िकारी मोड़।

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फूलन देवी
1996 में फूलन ने भदोही से लोकसभा का चुनाव लड़ा और सांसद बनी। सांसद बनने के बाद फूलन को 44 अशोका रोड में सरकारी आवास मिला। इसी आवास में 2001 में फूलन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के कुछ समय बाद तक फूलन का आवास खाली रहा।
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फूलन देवी
इसके बाद इस आवास में कैलाश मेघवाल रहने आए। कुछ दिन बाद 44 अशोका रोड से यह खबर आई कि इस आवास में फूलन की आत्मा भटकती है।
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फूलन देवी
उस समय कहा गया कि इस आवास में फूलन की आत्मा डाकू के रूप में घूमती है। हालांकि बाद में कैलाश मेघवाल ने इस बात को अफवाह बताते हुए फूलन की आत्मा भटकने की बात का खंडन किया। लेक‌िन इस घटना से एक बात तो सामने आयी ही क‌ि मरने के बाद भी फूलन का खौफ लोगों के जेहन से गया नहीं था।
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