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जानिए संतान आपकी शत्रु है या मित्र, पिछले जन्म से जुड़ा है राज

Thu, 13 Jul 2017 09:14 AM IST
amarujala.com- Presented by: किरण सिंह
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हिन्दू धर्म में पूर्व जन्म और कर्मों की अहमियत है। ऐसा माना जाता है कि पूर्व जन्म के कर्मों से ही व्यक्ति को उसके दूसरे जन्‍म में माता-पिता, भाई बहन, पति पत्नी, दोस्त-दुश्मन आदि रिश्ते नाते मिलते है, क्योंकि इन सबसे या तो कुछ लेना होता है या फिर कुछ देना होता है। इसी प्रकार इस जन्म के व्यक्ति के संतान के रूप में उसके पूर्व जन्म का कोई संबंधी ही ही आता है। शास्‍त्रों में इसे 4 प्रकार का बताया गया है।
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ऋणानुबन्ध: यदि आपने पिछले जन्म में किसी से कोई कर्ज लिया हो और उसे चुका नहीं पाएं तो आपके इस जन्म में वो व्यक्ति आपकी संतान बनकर आपके जीवन में आएगा और तब तक आपका धन व्यर्थ होगा, जब तक उसका पूरा हिसाब न हो जाएं।
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शत्रु पुत्रः अगर आपके पिछले जन्म में कोई आपका दुश्मन था और वो आपसे अपना बदला नहीं ले पाया था तो आपके इस जन्म में वो आपकी संतान के रूप में आपका एक अहम हिस्सा बनता है। जिसके बाद उसके कारण आपको जिंदगी भर परेशान ही रहना पड़ता है।

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उदासीनः इस प्रकार कि सन्तान माता पिता को न तो कष्ट देती है ओर ना ही सुख। विवाह होने पर यह माता- पिता से अलग हो जाते हैं ।
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सेवक पुत्र: यदि पिछले जन्म में आपने बिना किसी स्वार्थ के किसी की बहुत सेवा की है, तो वह व्यक्ति आपका कर्ज उतारने आपके वर्तमान जन्म में पुत्र बनकर आता है।
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