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PM Modi Kumbh Snan: प्रधानमंत्री मोदी ने क्यों चुना कुंभ स्नान के लिए 5 फरवरी का दिन? जानें इस तिथि का महत्व

Wed, 22 Jan 2025 04:30 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 फरवरी को कुंभ में स्नान करने वाले हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि प्रधानमंत्री ने प्रमुख अमृत स्नान के दिनों की बजाय 5 फरवरी का दिन ही क्यों चुना।
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क्यों माघ अष्टमी पर ही महाकुंभ में स्नान करेंगे पीएम मोदी? - फोटो : Amar Ujala
PM Modi Kumbh Snan On Magh Ashtami: महाकुंभ 2025 का आयोजन 13 जनवरी से प्रारंभ हो चुका है। इस आयोजन में देश-विदेश से साधु-संत और श्रद्धालु पवित्र नदी में स्नान के लिए एकत्र हो रहे हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस महाकुंभ के आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हिस्सा लेने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 फरवरी को कुंभ में स्नान करने वाले हैं, और इसके लिए सभी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। ऐसे में सभी के मन में एक सवाल उठ रहा है कि प्रधानमंत्री ने मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी जैसे प्रमुख अमृत स्नान के दिनों की बजाय 5 फरवरी का दिन क्यों चुना? या यह केवल एक संयोग है कि कुंभ स्नान के लिए उन्हें 5 फरवरी का दिन मिला। दरअसल, जब आप इस दिन के महत्व के बारे में जानेंगे तो प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता की सराहना किए बिना नहीं रह पाएंगे।

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माघ अष्टमी का महत्व - फोटो : अमर उजाला
माघ अष्टमी का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार 5 फरवरी माघ मास की गुप्त नवरात्रि की अष्टमी तिथि को है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन तप, ध्यान और साधना को बेहद फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन जो लोग तप, ध्यान और स्नान करते हैं उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।

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भीष्माष्टमी का महत्व - फोटो : adobestock
भीष्माष्टमी का महत्व
इसके अलावा यह दिन को भीष्माष्टमी के रूप में भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत के दौरान भीष्म पितामह ने बाणों की शय्या पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने और शुक्ल पक्ष की प्रतीक्षा की थी। माघ मास की अष्टमी तिथि पर उन्होंने श्रीकृष्ण की उपस्थिति में अपने प्राण त्यागे, जिसके बाद उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।

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महाकुंभ - फोटो : Adobe Stock
शास्त्रों में यह कहा गया है कि माघ मास की अष्टमी तिथि को पवित्र नदियों में स्नान और पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करना अत्यंत शुभ होता है। 
 

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महाकुंभ 2025 - फोटो : Adobe Stock
इस दिन जल, तिल, अक्षत और फूल अर्पित करने से पितरों को सद्गति मिलती है और तर्पण करने वाले व्यक्ति को भी मोक्ष का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस प्रकार माघ मास की अष्टमी तिथि को अत्यधिक पुण्यकारी माना गया है।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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