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Maha Kumbh 2025: माघ पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के स्नान को क्यों नहीं माना जा रहा अमृत स्नान?

Fri, 07 Feb 2025 12:37 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Maha Kumbh 2025: इस बार महाकुंभ में तीन ही अमृत स्नान (शाही स्नान) मान्य थे। महाकुंभ का तीसरा और आखिरी अमृत स्नान 3 फरवरी यानी वसंत पंचमी के दिन समाप्त हो चुका है। वसंत पंचमी के दिन अखाड़ों समेत कई लाख श्रद्धालुओं ने अमृत स्नान किया। 
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No Amrit Snan on Magh Purnima and Maha Shivratri - फोटो : amar ujala
No Amrit Snan on Magh Purnima and Maha Shivratri: महाकुंभ को हिन्दू धर्म के विशेष धार्मिक उत्सव के रूप में जाना जाता है। महाकुंभ का आयोजन 12 वर्ष में किया जाता है। महाकुंभ भारत की चार पवित्र नदियों  प्रयागराज के संगम , हरिद्वार में गंगा नदी, उज्जैन में शिप्रा नदी, और नासिक में गोदावरी नदी पर आयजित किया जाता है। इस बार प्रयागराज में महाकुंभ मेले का आयोजन किया गया है। 

इस बार महाकुंभ में तीन ही अमृत स्नान (शाही स्नान) मान्य थे। महाकुंभ का तीसरा और आखिरी अमृत स्नान 3 फरवरी यानी वसंत पंचमी के दिन समाप्त हो चुका है। वसंत पंचमी के दिन अखाड़ों समेत कई लाख श्रद्धालुओं ने अमृत स्नान किया। 

अब लोगों के बीच में इस बात को लेकर संशय है कि इस बार तीन अमृत स्नान ही क्यों हैं? महाकुंभ में होने वाले अगले स्नान जो माघ पूर्णिमा और महाशिवरात्रि को होंगे, उन्हें अमृत स्नान की श्रेणी में क्यों नहीं रखा गया। आइए जानते हैं विस्तार से। 

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No Amrit Snan on Magh Purnima and Maha Shivratri - फोटो : PTI
महाकुंभ स्नान का महत्व 

महाकुंभ में होने वाले स्नान न सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी विशेष महत्व रखता है। महाकुंभ में होने वाले स्नान का माहात्म्य इतना है कि इस दौरान साधु संत और अन्य श्रद्धालु संगम पर स्नान के साथ विभिन्न धार्मिक गतिविधियों में भाग लेकर आत्मिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि महाकुंभ में किया जाने वाला पवित्र स्नान न केवल जीवन को पापों से मुक्त करता है बल्कि आत्मा का भी शुद्धिकरण होता है। 
 
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No Amrit Snan on Magh Purnima and Maha Shivratri - फोटो : अमर उजाला
क्या कहते हैं ग्रह नक्षत्र? 
महाकुंभ में आयोजित अमृत स्नान ग्रह नक्षत्रों को ध्यान में रखकर निर्धारित किया जाता है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक जब सूर्य ग्रह मकर राशि में और गुरु ग्रह वृषभ राशि में विराजित रहते हैं तब अमृत स्नान (शाही स्नान) मान्य होता है। मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी की तिथियों पर गुरु ग्रह वृषभ राशि और सूर्य देव मकर राशि में थे। 
वहीं दूसरी ओर माघ पूर्णिमा के दिन देवगुरु बृहस्पति तो वृषभ राशि में विराजमान रहेंगे लेकिन सूर्यदेव कुंभ राशि में गोचर कर जाएंगे। इसलिए माघी पूर्णिमा के दिन होने वाला स्नान अमृत स्नान की श्रेणी में न आकर सामान्य स्नान माना जाएगा। इसी प्रकार महाशिवरात्रि के दिन भी सूर्य ग्रह कुंभ राशि में रहेंगे तो इस दिन का स्नान भी अमृत स्नान नहीं कहलाएगा। 
हालांकि माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के स्नान का भी उतना ही माहात्म्य है और 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के स्नान के साथ ही महाकुंभ का समापन हो जाएगा। 
 
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No Amrit Snan on Magh Purnima and Maha Shivratri - फोटो : Adobe Stock
 महाकुंभ के अगले स्नान की तिथियां 

12 फरवरी (बुधवार)- स्नान, माघी पूर्णिमा
26 फरवरी (बुधवार)-  स्नान, महाशिवरात्रि



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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