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तो यह है श्री कृष्ण की 16,108 रानियों का रहस्य?

Thu, 25 Aug 2016 09:34 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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जनमाष्टमी - फोटो : getty images
शास्‍त्रों में श्री कृष्‍ण की लीलाओं के बारे में बहुत सी कहानियां बताई गई हैं। ये भी कहा गया है कि भगवान कृष्‍ण की 16,108 पत्नियां थीं। दरअसल श्री कृष्‍ण का इन सभी पत्न‌ियों से कैसा संबंध था और कैसे एक साथ श्री कृष्‍ण ने हजारों कन्याओं से एक साथ व‌िवाह क‌िया यह अपने आप में अद्भुत कथा है।
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जनमाष्टमी - फोटो : getty images
वैसे तो श्रीकृष्‍ण राधा से प्रेम करते थे लेकिन उन्होंने शादी रुक्म‍णि से की। रुक्म‍णि उनकी पहली पत्नी थीं। श्रीकृष्‍ण ने रुक्म‍णि के कहने पर उनका अपहरण किया था।  इसके बाद उनकी शादी हुई थी। रुक्म‍णि विदर्भ के राजा भीष्मक की बेटी थीं। रुक्म‍णि ने मन ही मन कृष्‍ण को अपना पति मान लिया था। लेकिन रुक्म‍णि के भाई उनका विवाह चेदिराज शिशुपाल के साथ करना चाहते थे। रुक्म‍णि इस बात के लिए नहीं मानीं और अपने दिल की बात कृष्‍ण से कह दी। कृष्‍ण ने रुक्म‍णि की इच्‍छा पूरी की।
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जनमाष्टमी - फोटो : getty images
कृष्ण की दूसरी पत्नी जांबवती थी। वह निशादराज जाम्बवान की बेटी थीं। उनकी तीसरी पत्नी सत्राजीत की बेटी सत्यभामा हुईं। दरअसल सत्राजीत ने कृष्‍ण पर कई आरोप लगा लेकिन वो सभी आरोप झूठे निकले। इससे सत्राजीत को बहुत शर्मिंदगी हुई और उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह कृष्ण से कर दिया।
 

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जनमाष्टमी - फोटो : getty images
इसके बाद कृष्‍ण ने एक स्वयंवर में भाग लिया। वहां राजकुमारी मित्रबिंदा ने उन्हें वरमाला पहनाकर उनसे विवाह रचाया। जो उनकी चौथी पत्नी बनीं। इसके बाद  कौशल के राजा नग्नजीत के सात बैलों को कृष्ण ने एक साथ गिरा दिया। ये देखकर राजा नग्नजीत बहुत खुश हुए और उन्होंने अपनी बेटी सत्या से विवाह कृष्‍ण से कर दिया। इसके बाद कैकेय की राजकुमारी भद्रा से उनका विवाह हुआ।
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कृष्‍ण की छठी पत्नी भद्रदेश की राजकुमारी लक्ष्मणा हुईं हैं। लक्ष्मणा कृष्‍ण को चाहने लगी थीं, लेकिन उनका परिवार कृष्ण के साथ विवाह के खिलाफ था। इसलिए कृष्ण को लक्ष्माणा का भी अपहरण करना पड़ा। 
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महाभारत के अनुसार, लाक्षागृह से बच निकलने पर पांडवों से मिलने कृष्ण इंद्रप्रस्थ पहुंचे। इस दौरान अर्जुन के साथ कृष्ण भ्रमण करने निकले। वहां सूर्य पुत्री कालिन्दी भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही थीं। जब कृष्‍ण ने कालिंदी को तप करते देखा तो  उनकी आराधना से मुख न मोड़ सके। आखिरकार कृष्‍ण ने उनसे भी विवाह कर लिया। इस तरह कृष्ण की 8 पत्नियां हुईं- रुक्‍मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।
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एक बार प्रागज्योतिषपुर के दैत्यराज भौमासुर के अत्याचार से देवतागण त्राहि-त्राहि कर रहे थे। स्वर्गलोक के राजा देवराज इंद्र ने कृष्ण से प्रार्थना की। इंद्र ने कृष्‍ण को बताया कि भौमासुर ने पृथ्वी के कई राजाओं और आम लोगों की खूबसूरत बेटियों का हरण कर उन्हें अपना बंदी बना लिया है। इस संकट से आप ही उन्हें मुक्ति दिला सकते हैं।

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कुष्‍ण ने इंद्र की प्रार्थना स्वीकार की। श्रीकृष्ण अपनी प्रिय पत्नी सत्यभामा को साथ लेकर गरुड़ पर सवार हो गए और प्रागज्योतिषपुर पहुंचे। वहां पहुंचकर भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से सबसे पहले भौमासुर के पुत्रों का संहार किया। भौमासुर को स्त्री के हाथों मरने का श्राप मिला था इसलिए भगवान कृष्ण ने सत्यभामा को सारथी बनाया और फिर कृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से उसका वध कर दिया।

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इसके बाद कृष्‍ण्‍ा ने 16,100 कन्याओं को भौमासुर की कैद से आजाद कराया। सालों से भौमासुर के कैद में रहने के कारण इन्हें कोई भी अपनाने को तैयार नहीं था, इसलिए श्री कृष्ण ने सभी को आश्रय दिया। इन सभ्‍ाी कन्याओं को श्री कृष्‍ण ने अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार क‌िया।
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एक कहानी ये भी प्रचलित है कि पिछले जन्म में ये 16100 कन्‍याएं ऋषि-मुनि थे। इन सभी ने कृष्‍ण को पति रूप में पाने के लिए तपस्या की थी। अगले जन्म में इन सभी ऋषि-मुनियों ने कन्या के रूप में जन्म लिया और कृष्‍ण ने उन्हें अपनी पत्नी बनाकर इनकी मनोकामना पूर्ण की।
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