ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार विवार को भारतीय नव संवत्सर 2075 प्रारंभ हो रहा है और इस वर्ष का राजा सूर्य है। ऐसे में राज की सत्ता में परिवर्तन होता है।
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सूर्य ग्रहण का नजारा
- फोटो : रॉयटर्स
प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार विरोधकृत नामा इस संवत में पांच ग्रहण पडे़ंगे, जिनमें से एक ही भारत में दिखाई देगा। रविवार को हरकी पैड़ी सहित कई स्थानों पर पंचांग पूजन किए जाएंगे। श्रृद्धालु नए वर्ष का स्नान भी गंगा में करेंगे।
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सूर्य
- फोटो : SELF
संवत का राजा सूर्य है और मंत्री पद शनि के पास रहेगा। सूर्य जहां सभी ग्रहों के जनक हैं वहीं शनि को क्रूर ग्रह माना गया है। जनक और क्रूर की यह युति पूरे वर्ष चलती रहेगी। पंचांगों के अनुसार वर्षभर विरोध बने रहेंगे और राजपक्ष को लाभ कम होगा। इस वर्ष रोहिणी का वास संधि में होगा। वर्ष का निवास वैश्य के घर है। इस कारण धन का प्रसार अधिक होने के आसार हैं।
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astrology
- फोटो : google
ज्योतिष के अनुसार इस वर्ष खाद्यान्न और नए उद्योगों से खासा लाभ व्यापारियों को होगा। वर्षा की स्थिति मिश्रित बनी रहेगी। वर्षफल बताता है कि इस बार धरती का तापमान बढे़गा। अनेक प्रकार की नई बीमारियों का प्रकोप भी दिखाई देगा।
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ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार वर्ष का राजा सूर्य होने पर सत्ता में परिवर्तन होता है। मंत्रीपद शनि के पास होने से प्रजा को विरोध करना पड़ता है। इस बार मेघ का स्वामी शुक्र होगा। यह शुभकारी है। जलस्तंभ कम होने से गर्मी बहुत अधिक पड़ेगी। वर्ष का स्वामी अश्व है। इस कारण तेजगति पूरे समाज में दिखाई पड़ेगी।
वर्तमान संवत में पुरुषोत्तम मास भी पड़ रहा है। यह मास अधिक ज्येष्ठ के रुप में सामने आएगा। इस वर्ष प्रयाग का अर्द्धकुंभ शरू होगा, जिसका मुख्य स्नान मौनी अमावस्या को फरवरी में पडे़गा। अर्द्धकुंभ स्नान श्रवण नक्षत्र में होने से धरतीवासियों को विशेष लाभ होगा। ज्येष्ठ मास के पुरुषोत्तम पक्ष में गंगा दशहरे का पर्व पड़ रहा है। इस संवत में 19 प्रदोष होंगे और विवाह के शुभ मुहूर्तों की संख्या 65 होगी। 29 मई को खप्पर योग बन रहा है, जो सीमा विवाद को बढ़ाएगा। 28 जुलाई से 19 सितंबर तक सर्प योग रहेगा।