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Yogini Ekadashi 2020: योगिनी एकादशी कल, जानें तारीख, मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व

Tue, 16 Jun 2020 07:36 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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योगिनी एकादशी 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
Yogini Ekadashi 2020: आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु जी का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत रखा जाता है। हिन्दू मान्यता के अनुसार, योगिनी एकादशी व्रत को करने से 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन करने के बराबर का फल मिलता है इसलिए इस व्रत का अपना विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं योगिनी एकादशी का मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।
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कब है योगिनी एकादशी व्रत - फोटो : Social media
कल है योगिनी एकादशी व्रत
Yogini Ekadashi 2020 date: हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रति वर्ष योगिनी एकादशी व्रत आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। इस वर्ष यह तिथि 17 जून को पड़ रही है। इसलिए एकादशी व्रत 17 जून को रखा जाएगा।
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एकादशी व्रत का मुहूर्त - फोटो : Social Media
एकादशी व्रत का मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारम्भ - जून 16, 2020 को प्रातः 05:40 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त - जून 17, 2020 को सुबह 07:50 बजे तक
पारण का समय - प्रातः 05:28 से 08:14 बजे तक (18 जून 2020)

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योगिनी एकादशी व्रत विधि - फोटो : Social Media
योगिनी एकादशी व्रत विधि
  • एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठें। 
  • शौचादि से निवृत्त होकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। 
  • घर के मंदिर में साफ-सफाई करें। 
  • भगवान विष्णु जी की प्रतिमा को गंगा जल से नहलाएं। 
  • अब दीपक जलाकर उनका स्मरण करें। 
  • भगवान विष्णु की पूजा में उनकी स्तुति करें। 
  • पूजा में तुलसी के पत्तों का भी प्रयोग करें। 
  • पूजा के अंत में विष्णु आरती करें। 
  • शाम को भी भगवान विष्णु जी के समक्ष दीपक जलाकर उनकी आराधना करें। 
  • इस समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। 
  • अगले दिन यानि द्वादशी के समय शुद्ध होकर व्रत पारण मुहूर्त के समय व्रत खोलें। 
  • सबसे पहले भगवान विष्णु जी को भोग लगाएं। 
  • भोग में अपनी इच्छानुसार कुछ मीठा भी शामिल करें। 
  • लोगों में प्रसाद बांटें और ब्राह्मणों को भोजन कर कराकर उन्हें दान-दक्षिणा दें।
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योगिनी एकादशी का महत्व - फोटो : सोशल मीडिया
योगिनी एकादशी का महत्व
योगिनी एकादशी के विषय में पुराणों में एक कथा है। जिसमें हेम नाम का एक माली था। जो काम भाव में लीन होकर ऐसी गलती कर बैठा कि उसे राजा का श्राप मिला, जिससे उसे कुष्ठ रोग हो गया। एक ऋषि ने योगिनी एकादशी का व्रत करने को कहा, जिससे उसका कुष्ठ रोग ठीक हो गया और तभी से इस एकादशी का महत्व है। इस एकादशी के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से पाप नष्ट होते हैं और मनुष्य के मरने बाद स्वर्ग मिलता है।
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