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Vat Savitri Puja 2025: वट सावित्री व्रत आज, अगर वट वृक्ष न हो तो कैसे करें पूजा? ऐसे पाएं व्रत का पूरा फल

Mon, 26 May 2025 07:34 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Savitri vrat 2025: अगर आपके आस-पास वट (बरगद) का पेड़ नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में भी आप विधिपूर्वक पूजा कर सकती हैं।
 
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Vat Savitri Vrat 2025 - फोटो : adobe
Vat Savitri Vrat Puja at home: आज, 26 मई 2025 को वट सावित्री व्रत है। यह पर्व ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाया जाता है और यह सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस व्रत के पीछे मान्यता है कि सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे, इसलिए इस दिन वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है। साथ ही यह भी माना जाता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा,विष्णु और महेश  त्रिदेवों का वास होता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
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हालांकि, कई बार ऐसा होता है कि जहां महिलाएं रहती हैं, वहां वट वृक्ष उपलब्ध नहीं होता। ऐसी स्थिति में यह सवाल उठता है कि पूजा कैसे की जाए। दरअसल, यह व्रत आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, इसलिए अगर वट वृक्ष पास में न हो तो भी व्रत की भावना में कोई कमी नहीं आती। मन की सच्ची भावना और विश्वास से किया गया संकल्प ही सबसे अधिक महत्व रखता है। आइये जानें कैसे बिना बरगद के पेड़ के आप वाट सावित्री कि पूजा कर सकती हैं। 
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Vat Savitri Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
वट वृक्ष की मिट्टी घर लाकर करें पूजा
यदि आपके आस-पास वट वृक्ष नहीं है, तो व्रत से एक दिन पहले आप किसी ऐसे स्थान पर जाकर वट वृक्ष की थोड़ी सी मिट्टी घर ले आएं। इस मिट्टी को एक साफ स्थान पर रखकर उसके ऊपर सावित्री, सत्यवान और यमराज की छोटी मूर्तियाँ या चित्र स्थापित करें। उसी स्थान को पूजा स्थल मानते हुए पूरे श्रद्धा भाव से पूजा करें। मिट्टी का यह प्रतीकात्मक रूप, वट वृक्ष की उपस्थिति के समान ही माना जाता है। जब भावना सच्ची हो, तो प्रतीक भी पूजनीय बन जाता है।
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Vat Savitri Vrat 2025 - फोटो : adobe
वट वृक्ष की टहनी लाकर गमले में लगाएं
अगर आपको पूरा पेड़ नहीं मिल रहा लेकिन कहीं से वट वृक्ष की कोई फलयुक्त  टहनी मिल सकती है, तो वह भी एक उत्तम विकल्प है। उस डाली को किसी गमले में मिट्टी में रोप दें और व्रत के दिन उसे ही वट वृक्ष का प्रतीक मानकर उसकी पूजा करें। ऐसे में आप पूजा के सारे पारंपरिक कर्म उसी डाली के चारों ओर कर सकती हैं, जैसे कि धागा बांधना, कथा सुनना, परिक्रमा करना आदि।

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Vat Savitri Vrat 2025 - फोटो : adobe stock
तुलसी के पौधे के पास बैठकर करें पूजा
यदि न वट वृक्ष मिल पाए, न उसकी डाली, और न ही मिट्टी उपलब्ध हो, तो एक और पवित्र विकल्प है  तुलसी का पौधा। तुलसी हिन्दू धर्म में अत्यंत पूजनीय मानी जाती है और घर में ही उपलब्ध होती है। ऐसी स्थिति में आप तुलसी के पास बैठकर श्रद्धा और विधि के साथ व्रत की पूजा कर सकती हैं। वहां पर आप व्रत की कथा सुनें, व्रत की भावना को आत्मसात करें और मन से संकल्प लें। इस रूप में भी व्रत पूर्ण माना जाता है।
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Vat Savitri Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
भावना और श्रद्धा है सबसे महत्वपूर्ण
यह समझना ज़रूरी है कि किसी भी पूजा में स्थान या सामग्री से ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है आपकी श्रद्धा और भावना। यदि आप सच्चे मन से, आस्था के साथ व्रत करती हैं तो वट वृक्ष की शारीरिक अनुपस्थिति आपके पुण्य या फल में कोई कमी नहीं लाती। सावित्री ने अपने संकल्प और निष्ठा से यमराज तक को झुका दिया था।  उसी भावना से अगर आप व्रत करें, तो परिणाम भी उतना ही फलदायी होगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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