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Vat Savitri 2020: वट सावित्री व्रत आज, जानें पूजा मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व

Fri, 22 May 2020 02:57 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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वट सावित्री व्रत 2020 - फोटो : self
शुक्रवार, 22 मई यानी आज वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। यह व्रत विशेषकर विवाहित महिलाओं के द्वारा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि कोई शादीशुदा महिला इस व्रत को सच्चे मन से करती है तो उसका पति दीर्घायु होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि के दिन रखा जाता है। आइए जानते हैं इस व्रत का शुभ मुहूर्त और व्रत विधि। 
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वट सावित्री व्रत 2019 - फोटो : गूगल
वट सावित्री पूजा 2020 मुहूर्त
अमावस्या तिथि आरंभ - 21:35 बजे (21 मई 2020)
अमावस्या तिथि समाप्त - 23:07 बजे (22 मई 2020)

वट सावित्री व्रत कथा - सावित्री, जिसने यमराज से पति की मृत्यु के बाद मांगा था अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद 
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वट सावित्री व्रत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
वट सावित्री व्रत विधि
  • सुबह प्रातः जल्दी उठें और स्नान करें।
  • स्नान के बाद व्रत करने का संकल्प लें। 
  • महिलाएं इस व्रत की शुरुआत पूरे श्रृगांर करने के बाद शुरू करें। 
  • इस दिन पीला सिंदूर लगाना शुभ माना जाता है। 
  • बरगद के पेड़ सावित्री-सत्यवान और यमराज की मूर्ति रखें। 
  • बरगद के पेड़ में जल डालकर उसमें पुष्प, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाएं। 
  • सावित्री-सत्यवान और यमराज की मूर्ति रखें। 
  • बरगद के पेड़ में जल चढ़ाएं।
  • पेड़ में रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद मांगें।
  • वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें। 
  • इसके बाद हाथ में काला चना लेकर इस व्रत का कथा सुनें। 
  • कथा सुनने के बाद पंडित जी को दान देना न भूलें।
  • दान में आप वस्त्र, पैसे और चना दें। 
  • अगले दिन व्रत को तोड़ने से पहले बरगद के वृक्ष का कोपल खाकर उपवास समाप्त करें। 
  • इसके साथ ही सौभाग्यवती महिला को श्रृंगार का सामान जरूर दान में दें। 
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वट सावित्री का महत्व - फोटो : social media
वट सावित्री व्रत का महत्व
वट सावित्री में दो शब्द हैं और इन्हीं दो शब्दों में इस व्रत का धार्मिक महत्व छिपा हुआ है। पहला शब्द 'वट' (बरगद) है। हिन्दू धर्म में वट वृक्ष को पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) तीनों देवों का वास होता है। इसलिए बरगद के पेड़ की आराधना करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं दूसरा शब्द सावित्री है, जो महिला सशक्तिकरण का महान प्रतीक है। पौराणिक कथाओं में सावित्री का श्रेष्ठ स्थान है। कहा जाता है कि सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से ले आई थी। वट सावित्री व्रत में महिलाएं सावित्री के समान अपने पति की दीर्घायु की कामना तीनों देवताओं से करती हैं ताकि उनके पति को समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति हो।
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