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Valmiki Jayanti 2020: वाल्मीकि जयंती आज, जानें शुभ मुहूर्त और मनाने की विधि और धार्मिक महत्व

Sat, 31 Oct 2020 07:32 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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वाल्मीकि जयंती 2020 - फोटो : pinterst
Valmiki Jayanti 2020: वाल्मीकि जयंती 31 अक्टूबर के दिन मनायी जाएगी। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण जैसे महाकाव्य की रचना की थी। उन्हें आदिकवि के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि का जन्म आश्विन पूर्णिमा के दिन हुआ था। उनका जन्म महर्षि कश्यप और अदिति के नौवें पुत्र वरुण और उनकी पत्नी चर्षणी के यहां माना जाता है। भृगु ऋषि इनके बड़े भाई थे। आइए जानते हैं वाल्मीकि जयंती का शुभ महूर्त, मनाने की विधि और इस पर्व का महत्व।
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वाल्मीकि जयंती का शुभ मुहूर्त 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
वाल्मीकि जयंती का शुभ मुहूर्त 
पूर्णिमा तिथि का आरंभ - 30 अक्तूबर को शाम 5 बजकर 47 मिनट से 
पूर्णिमा तिथि की समाप्ति - 31 अक्तूबर को रात के 8 बजकर 21 मिनट पर
 
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महर्षि वाल्मीकि की जयंती मनाते लोग। - फोटो : सोशल मीडिया
इस तरह मनायी जाती है वाल्मीकि जयंती
वाल्मीकि जयंती देश भर में धूम-धाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। इस मौके पर मंदिरों में पूजा-अर्चना कर वाल्मीकि जी की विशेष आरती उतारी जाती है। साथ ही वाल्मीकि जयंती की शोभा यात्रा भी निकाली जाती है, जिसमें लोग बड़े उत्साह से भाग लेते हैं। इस दिन रामायण का पाठ और राम नाम का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है। 

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वाल्मीकि जयंती 2020 - फोटो : pinterst
ऐसे पड़ा था वाल्मीकि नाम
महर्षि वाल्मीकि के नाम के विषय में भी कहा जाता है कि एक बार महर्षि वाल्मीकि ध्यान में मग्न थे। तब उनके पूरे शरीर को दीमको ने घर लिया था। साधना पूर्ण होने के बाद वे दीमक को हटा कर बाहर निकले थे। दीमकों के घर को वाल्मीकि कहा जाता है। इसी के कारण उनका नाम वाल्मीकि हुआ।
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भगवान राम और माता सीता - फोटो : social media
मां सीता को दिया था आश्रय
जब भगवान राम ने माता सीता को त्याग दिया था। तब माता सीता महर्षि वाल्मिकी का आश्रम में ही रहती थी। यहीं पर उन्होंने लव और कुश को जन्म दिया था। यहां पर माता सीता वनदेवी के नाम से निवास करती थी। इसी वजह से वाल्मिकी द्वारा लिखी गई रामायण में लव कुश के जन्म के बाद का वृतांत भी मिलता है। महर्षि वाल्मिकी के द्वारा ही लव कुश को ज्ञान भी दिया गया
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वाल्मीकि जयंती 2020
महाकाव्य रामायण की रचना 
धार्मिक कथाओं के अनुसार एक पक्षी के वध पर जो श्लोक महर्षि वाल्मीकि के मुख से निकला था वह परमपिता ब्रह्मा जी की प्रेरणा से निकला था और यह बात स्वयं ब्रह्मा जी ने उन्हें बताई थी उसी के बाद ही उन्होने रामायण की रचना की थी। माना जाता है कि रामायण वैदिक जगत का सर्वप्रथम काव्य था।रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत भाषा में की थी और जिसमें कुल चौबीस हजार श्लोक है।
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