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Vivah Panchami Rituals 2025: कैसे करें राम–सीता विवाह पूजा? जानें मंत्र, आरती और महत्व

Tue, 25 Nov 2025 10:48 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Vivah Panchami 2025 : विवाह पंचमी पर मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पंचमी को भगवान राम और माता सीता के दिव्य विवाह का पावन पर्व मनाया जा रहा है। जानें पूजा विधि, अनुष्ठान, मंत्र और शुभ संदेश देकर सभी को दें आशीर्वाद।
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विवाह पंचमी 2025 - फोटो : amar ujala
Vivah Panchami 2025: मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्रीराम और माता सीता के दिव्य विवाह की स्मृति को समर्पित है, जिसे हिंदू परंपराओं में अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना गया है।
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वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष विवाह पंचमी 25 नवंबर यानी आज मनाई जा रही है। मान्यता है कि इस दिन विधिवत पूजा और व्रत करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस अवसर पर विशेष अनुष्ठान और आस्थापूर्ण रीति-रिवाज निभाए जाते हैं, जिनकी जानकारी नीचे दी गई है।
Vivah Panchami 2025: विवाह पंचमी पर इन संदेशों से दें सभी को शुभकामनाएं, राम-सीता का मिलेगा आशीर्वाद
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राम–सीता विवाह अनुष्ठान का शुभ समय - फोटो : freepik
राम–सीता विवाह अनुष्ठान का शुभ समय
विवाह पंचमी पर राम–सीता विवाह का पावन अनुष्ठान शाम 4:49 बजे से लेकर शाम 6:33 बजे तक किया जाएगा। यह अवधि अत्यंत शुभ मानी जाती है और इसी समय पूजन तथा विवाह-लीला का आयोजन श्रेष्ठ माना जाता है।
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भगवान को पंजीरी, पंचामृत, खीर, पीली मिठाई और पीले रंग के फलों का भोग अर्पित किया जाता है। - फोटो : instagram
भोग सामग्री
इस खास दिन भगवान को पंजीरी, पंचामृत, खीर, पीली मिठाई और पीले रंग के फलों का भोग अर्पित किया जाता है। पीले पदार्थों को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इन्हें विशेष रूप से चढ़ाया जाता है।

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विवाह पंचमी पूजा विधि - फोटो : freepik
पूजा विधि 
  • सुबह स्नान करके स्वच्छ और साफ वस्त्र पहनें।
  • दिन की पूजा या व्रत का संकल्प करें
  • पूजा की जगह को साफ कर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
  • चौकी पर भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमा या तस्वीर रखें।
  • भगवान राम को पीले वस्त्र, चंदन, पुष्प आदि अर्पित करें।
  • माता सीता को लाल वस्त्र, सिंदूर और सोलह श्रृंगार का सामान समर्पित करें।
  • दोनों को फूलों की माला पहनाकर उनका प्रतीकात्मक विवाह (गठबंधन) कराएँ।
  • घी का दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें।
  • श्रीरामचरितमानस में वर्णित राम–सीता विवाह प्रसंग का पाठ करें।
  • चाहें तो सुंदरकांड या रामरक्षा स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैं। यह दिन के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
  • अंत में श्रद्धा से आरती करें और किसी भी भूल के लिए भगवान से क्षमा प्रार्थना करें।
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विवाह पंचमी पूजन मंत्र - फोटो : freepik
पूजन मंत्र 
“श्रीं रामाय नमः”

यह मंत्र भगवान श्रीराम की कृपा और संरक्षण पाने के लिए जपा जाता है।

“जय सियावर रामचन्द्र की जय, सीताराम चरण रति मोहि अनुदिन हो”
इस स्तुति से भक्त राम–सीता के चरणों में भक्ति, प्रेम और समर्पण की भावना व्यक्त करते हैं।
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विवाह पंचमी महत्व - फोटो : adobe stock
विवाह पंचमी महत्व 
विवाह पंचमी भगवान राम और माता सीता के पवित्र एवं आदर्श दांपत्य जीवन की याद दिलाती है। यह पर्व धर्म, प्रेम, निष्ठा और त्याग के उच्च आदर्शों का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरे मन से पूजा करने पर विवाह संबंधी समस्याएँ धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। विशेष रूप से जिन लोगों के विवाह में बाधाएँ आ रही हों, उन्हें इस दिन श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ करने से वैवाहिक जीवन में सामंजस्य, प्रेम और सुख की प्राप्ति होती है।
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भगवान राम की आरती - फोटो : adobe stock
।।भगवान राम की आरती।। 
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।

कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।

भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।\
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।

मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।

एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।

दोहा- जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।
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भगवान राम की आरती - फोटो : Adobe
।।मां सीता आरती।। 

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिणी,
परम दयामयी दिनोधारिणी,
सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

सती श्रोमणि पति हित कारिणी,
पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,
पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,
त्याग धर्म मूर्ति धरी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पवन मति आई,
सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,
शरणागत जन भय हरी की ॥

आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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