31 अक्टूबर को देवप्रबोधिनी एकादशी का व्रत है। यह पर्व कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। देवप्रबोधिनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु चार महीने तक सोने के बाद जागते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता तुलसी का विवाह होता है। आइए जानते हैं तुलसी विवाह से जुड़ी हुई कुछ बातें।
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तुलसी विवाह के दौरान शाम को तुलसी के पौधे को घर के आंगन या छत के बीचों-बीच में रखना चाहिए।
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जिस तरह से किसी कन्या के विवाह में चुनरी का महत्व होता है उसी तरह से तुलसी विवाह में लाल चुनरी का प्रयोग आवश्यक होता है। तुलसी विवाह में सुहाग की सारी सामग्री के साथ लाल चुनरी जरूर चढ़ाएं।
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तुलसी विवाह के दौरान भगवान शालिग्राम को माता तुलसी के पास रखें, लेकिन पूजा के दौरान उस पर चावल नहीं चढ़ाना चाहिए बल्कि तिल चढ़ाया जाता है।
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जिस प्रकार किसी शादी समारोह में विवाह मंडप होता है उसी तरह से गन्ने का प्रयोग करके तुलसीजी और भगवान विष्णु के विवाह के लिए मंडप बनाएं।