Sita Navami 2026
- फोटो : adobe stock
सीता नवमी व्रत कथा
सीता नवमी की कथा को लेकर ऐसा कहा जाता है कि, एक समय की बात है जब मिथिला में बारिश नहीं हो रही है। बारिश न होने के कारण राजा जनक बेहद परेशान हो चुके थे। इसी विषय को लेकर राजा जनक ने सभी ऋषि-मुनियों को बुलाया और बारीश न होने पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान ऋषि-मुनियों ने राजा जनक से खेत में हल चलाने के लिए कहा। उनका मानना था कि, अगर राजा जनक खेत में हल चलाते हैं, तो इससे इंद्र देव प्रसन्न हो सकते हैं और उनकी विशेष कृपा अवश्य बरसेगी।
ऋषि-मुनियों की बातों से आग्रह करते हुए राजा जनक ने खेत में हल चलाया। यह हिंदू पंचांग के वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि थी। माना जाता है कि, खेत में हल चलाते हुए राजा जनक को एक वस्तु टकराई। इस दृश्य को देख राजा ने सेवादारों से उस जगह की पूरी खुदाई करने को कहा।
राजा के आदेश के बाद उस स्थान की खुदाई पर एक कलश प्राप्त होता है, जिसमें एक कन्या थी। माना जाता है कि, उस कन्या को राजा जनक ने अपनी पुत्री मानकर अपने पास रखा और उसका पालन-पोषण किया। कहते हैं कि, राजा जनक ने उस कन्या का नाम सीता रखा। इसलिए हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी मनाई जाती है, जिसपर विशेष रूप से देवी सीता की पूजा-अर्चना की जाती है। कहते हैं कि, इस तिथि पर उपवास रखने से जीवन में सुख-समृद्धि वास करती हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता और संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।