शीतला अष्टमी पूजा विधि
स्कंद पुराण के अनुसार ब्रह्माजी ने सृष्टि को सेहदमंद और रोगमुक्त रखने का कार्य शीतला माता को दिया था। यही वजह है कि लोग गर्मी के प्रकोप से बचने और संक्रामक रोगों से मुक्त रहने के लिए शीतला माता की पूजा करते हैं। देवी शीतला स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं। मान्यता है कि नेत्र रोग,ज्वर,चेचक,कुष्ठ रोग,फोड़े-फुंसियां तथा अन्य चर्म रोगों से आहत होने पर मां की आराधना रोगमुक्त कर देती है,यही नहीं माता की आराधना करने वाले भक्त के कुल में भी यदि कोई इन रोगों से पीड़ित हो तो ये रोग-दोष दूर हो जाते हैं। शीतला माता के स्वरूप के प्रतीकात्मक अर्थ हैं। मां का स्वरूप हाथों में कलश,सूप,मार्जन(झाड़ू) तथा नीम के पत्ते धारण किए हुए चित्रित किया गया है।