फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sheetala Ashtami 2025: शीतला अष्टमी आज, यहां जानें मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

Sat, 22 Mar 2025 06:47 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Sheetala Ashtami 2025 Date: शीतला अष्टमी का व्रत विशेष रूप से जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य लाभ के लिए रखा जाता है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और भगवान शीतला की कृपा से संतान सुख और धन की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन
1 of 4
शीतला अष्टमी 2025 - फोटो : amar ujala
Sheetla Ashtami Kab Hai: शीतला अष्टमी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे विशेष रूप से चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है और बासी भोजन (जैसे मीठे चावल, हलवा, पूरी आदि) अर्पित करने की परंपरा है। शीतला अष्टमी का व्रत बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है।

Holika Dahan Remedies: होलिका दहन की अग्नि में डालें ये 10 चीजें, मिलेगी सुख-समृद्धि और रोगों से मुक्ति

हिंदू धर्म में यह विश्वास है कि शीतला अष्टमी का व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी परेशानियां और कष्ट दूर हो जाते हैं। यह व्रत स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं, संतान सुख, और धन, वैभव की प्राप्ति के लिए भी अत्यधिक लाभकारी माना जाता है। साथ ही, यह व्रत करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

Kharmas 2025: कब से शुरू होगा खरमास? जानें मार्च में कब लगेगा शुभ कार्यों पर विराम

विज्ञापन

2 of 4
शीतला अष्टमी 2025 - फोटो : amar ujala
शीतला अष्टमी 2025 की तिथि:
इस साल शीतला अष्टमी का व्रत 22 मार्च 2025 को रखा जाएगा।
अष्टमी तिथि की शुरुआत: 22 मार्च 2025, सुबह 4:23 बजे
अष्टमी तिथि का समापन: 23 मार्च 2025, सुबह 5:23 बजे
शीतला अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त: 22 मार्च 2025, सुबह 6:16 बजे से शाम 6:26 बजे तक
विज्ञापन

3 of 4
शीतला अष्टमी 2025 - फोटो : amar ujala
शीतला अष्टमी का महत्व
हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिन शीतला माता की पूजा के लिए समर्पित है, जो रोगों से मुक्ति, संतान सुख, और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। इस दिन व्रत रखने से जीवन में शारीरिक और मानसिक कष्टों से राहत मिलती है, और घर में सुख-शांति का वास होता है। विशेष रूप से बासी भोजन अर्पित करने की परंपरा के माध्यम से पारिवारिक संबंधों में मधुरता आती है और आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। साथ ही, यह व्रत संतान सुख, स्वास्थ्य में सुधार और परिवार में सुख-शांति की प्राप्ति का कारक माना जाता है।
विज्ञापन

4 of 4
शीतला अष्टमी 2025 - फोटो : amar ujala
शीतला अष्टमी पूजा विधि
1. स्नान और वस्त्र: शीतला अष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें।
2. व्रत का संकल्प: फिर माता शीतला का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।
3. पूजा का आयोजन: माता शीतला की पूजा विधिपूर्वक करें। पूजा में रोली, हल्दी, अक्षत, बड़कुले की माला और मेहंदी अर्पित करें।
4. भोग अर्पण: रात के समय बने प्रसाद जैसे मीठे चावल, हलवा, पूरी आदि माता को अर्पित करें।
5. व्रत कथा और शीतला स्त्रोत: पूजा के दौरान शीतला अष्टमी की कथा और शीतला स्त्रोत का पाठ करें।
6. आरती और पारण: अंत में माता की आरती करें और पूजा समाप्त होने के बाद माता का भोग ग्रहण करके व्रत का पारण करें।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें