फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शारदीय नवरात्रि 2026: 10 या 11 अक्तूबर कब शुरू होगा नवरात्रि? जानें सही तिथि और कलश स्थापना का समय

Sat, 03 Oct 2026 01:25 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

शारदीय नवरात्रि 2026 की तारीख को लेकर इस बार लोगों के बीच भ्रम है। प्रतिपदा तिथि 10 अक्तूबर की रात शुरू होगी, लेकिन नवरात्रि का पहला व्रत और घटस्थापना 11 अक्तूबर को होगी। जानें पंचांग के अनुसार सही तारीख, मुहूर्त और वजह। 
विज्ञापन
1 of 5
शारदीय नवरात्रि 2026 - फोटो : AI
शारदीय नवरात्रि 2026 की तारीख को लेकर इस बार लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बन सकती है। इसकी वजह यह है कि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्तूबर की रात से शुरू हो रही है, जबकि नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्तूबर को माना जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कलश स्थापना किस दिन होगी और नवरात्रि का पहला व्रत कब रखा जाएगा?

इसका उत्तर समझने के लिए पंचांग में तिथि के आरंभ और पूजा के लिए निर्धारित शुभ समय, दोनों को देखना जरूरी है। पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 10 अक्तूबर 2026 की रात 9 बजकर 19 मिनट पर आरंभ होगी और 11 अक्तूबर की रात 9 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। वहीं, शारदीय नवरात्रि की घटस्थापना 11 अक्तूबर, रविवार को की जाएगी।
विज्ञापन

2 of 5
रात में प्रतिपदा शुरू होने का मतलब क्या है? - फोटो : freepik
रात में प्रतिपदा शुरू होने का मतलब क्या है?
हिंदू पंचांग की तिथियां अंग्रेजी कैलेंडर की तरह आधी रात को नहीं बदलतीं। तिथि का निर्धारण सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के बीच बनने वाली कोणीय दूरी से होता है। जब यह दूरी 12 अंश बढ़ जाती है, तो एक नई तिथि शुरू होती है। इसलिए तिथि का परिवर्तन सुबह, दिन या रात किसी भी समय हो सकता है।

इसी वजह से एक हिंदू तिथि दो अलग-अलग अंग्रेजी तारीखों के बीच आ सकती है। केवल तिथि शुरू होने का समय देखकर व्रत या त्योहार की तारीख तय करना सही नहीं होता। किस धार्मिक अनुष्ठान के लिए कौन-सी तिथि मान्य होगी, यह भी देखना आवश्यक है।
विज्ञापन

3 of 5
11 अक्तूबर को ही क्यों होगी घटस्थापना? - फोटो : freepik
11 अक्तूबर को ही क्यों होगी घटस्थापना?
11 अक्तूबर को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि विद्यमान रहेगी। इसे उदयातिथि कहा जाता है। इसी आधार पर नवरात्रि का पहला व्रत रखा जाएगा और मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। हालांकि हर पर्व और धार्मिक अनुष्ठान के लिए उदयातिथि का नियम लागू हो, यह जरूरी नहीं है। कुछ अवसरों पर विशेष काल की तिथि को प्राथमिकता दी जाती है।

घटस्थापना के लिए प्रतिपदा के साथ उपयुक्त समय भी जरूरी होता है। रात में कलश स्थापना करना उचित नहीं माना जाता। इसलिए 10 अक्तूबर की रात प्रतिपदा शुरू होते ही घटस्थापना करने के बजाय 11 अक्तूबर को निर्धारित मुहूर्त में कलश स्थापित किया जाएगा।

4 of 5
दिल्ली में घटस्थापना का मुहूर्त - फोटो : adobe
घटस्थापना का मुहूर्त
11 अक्तूबर को घटस्थापना के लिए सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक का समय बताया गया है। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। अन्य शहरों में स्थानीय सूर्योदय के आधार पर मुहूर्त में अंतर हो सकता है। हालांकि स्थान के अनुसार घटस्थापना का मुहूर्त अलग-अलग हो सकता है।

इस दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग भी रहेंगे। इन स्थितियों को घटस्थापना के लिए सामान्यतः अनुकूल नहीं माना जाता, लेकिन पंचांग में इन्हीं परिस्थितियों के बीच निर्धारित घटस्थापना मुहूर्त दिया गया है। इसलिए इनके कारण नवरात्रि की शुरुआत एक दिन आगे नहीं बढ़ेगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
घटस्थापना का मुहूर्त - फोटो : adobe stock
10 अक्तूबर की रात सामान्य देवी पूजा, आरती या नाम-स्मरण किया जा सकता है। पूजा की तैयारी और आवश्यक सामग्री पहले से व्यवस्थित करना भी संभव है। लेकिन नवरात्रि की औपचारिक शुरुआत के लिए घटस्थापना और पहला व्रत 11 अक्तूबर को ही होगा। 

नवरात्रि और दुर्गा पूजा: नवरात्रि नौ दिन तो बंगाल में दुर्गा पूजा पांच दिन क्यों? जानिए धार्मिक अंतर

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें