Navratri Akhand Jyoti: 22 सितंबर से शुरू हो रही शारदीय नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का विशेष महत्व है। यह घर में सुख-समृद्धि लाती है। आइए इस लेख में जानते हैं कि इस दिव्य ज्योति को जलाने के सही नियम क्या हैं और इसके खंडित होने पर क्या किया जाना चाहिए।
Navratri me Akhand Jyot ka Mahatva: शक्ति और साधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर 2025, सोमवार से शुरू हो रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में घटस्थापना के साथ ही 'अखंड ज्योति' जलाने की परंपरा का विशेष महत्व है। अखंड ज्योति का अर्थ है, एक ऐसी ज्योति जो खंडित न हो, यानी नौ दिनों तक निरंतर जलती रहे। यह अखंड ज्योति न केवल घर के अंधकार को, बल्कि जीवन की नकारात्मकता को भी दूर करती है।
इसे देवी दुर्गा की उपस्थिति का प्रतीक और साधक की अटूट श्रद्धा और संकल्प का परिचायक माना जाता है। मान्यता है कि जिन घरों में नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलती है, वहां मां दुर्गा साक्षात वास करती हैं और परिवार पर कोई संकट नहीं आने देतीं। हालांकि, इस दिव्य ज्योति को जलाने और इसे बनाए रखने के कुछ कड़े नियम हैं, जिनका पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
विज्ञापन
2 of 5
पूजा थाली
- फोटो : adobe
अखंड ज्योति का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है और मां भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस ज्योति के प्रकाश से परिवार के सदस्यों को आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह परिवार की सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोषों को भी समाप्त करती है।
ज्योति जलाने के नियम
अखंड ज्योति को जलाने से पहले मन में नौ दिनों तक इसे प्रज्ज्वलित रखने का संकल्प लें। ज्योति के लिए पीतल या मिट्टी का दीया इस्तेमाल करें और इसे सीधे जमीन पर न रखकर एक चौकी या पाटे पर स्थापित करें। ज्योति जलाने के लिए गाय के शुद्ध घी का उपयोग करना सर्वोत्तम माना जाता है। यदि यह संभव न हो तो आप तिल या सरसों के तेल का भी उपयोग कर सकते हैं।
नवरात्रि पर अखंड ज्योति के नियम
- फोटो : adobe stock
ज्योति को निरंतर जलाए रखें
एक बार ज्योति जला दी, तो यह सुनिश्चित करें कि यह नौ दिनों तक निरंतर जलती रहे। इसे कभी भी अकेला न छोड़ें और हवा से बचाने के लिए कांच की चिमनी से ढककर रखें। यदि घी या तेल खत्म होने लगे या बत्ती ठीक करनी हो, तो दीये को बिना बुझाए ही सावधानीपूर्वक यह कार्य करें। आप एक छोटी जलती हुई तीली की सहायता ले सकते हैं।
यदि ज्योति बुझ जाए तो क्या करें?
अगर पूरी सावधानी के बावजूद ज्योति बुझ जाए, तो घबराएं नहीं। तुरंत देवी से क्षमा-प्रार्थना करते हुए और उनके मंत्रों का जाप करते हुए ज्योति को दोबारा जला दें। याद रखें कि इस साधना में आपकी श्रद्धा और भावना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। सच्ची निष्ठा से की गई पूजा को देवी अवश्य स्वीकार करती हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।