चंद्रमा की सोलह कलाओं का महत्व
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चंद्रमा की सोलह कलाओं का महत्व
चंद्रमा को वेद, पुराण, ग्रंथों में मन के तुल्य स्वीकार किया जाता है- ‘चंद्रमा मनसो जात:’। वैदिक मनीषा में यह स्पष्टत: उल्लिखित है कि षोडश कलाओं से युक्त अमृत वर्षण करने वाले शरद चंद्र की पवित्र शीतलता मनुष्य के शरीर एवं मन दोनों को ही शीतल कर जाती है। यही कारण है कि इस रात्रि को सकारात्मकता प्रदान करने वाली तथा आरोग्यवर्धनकारी कहा गया है । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्रमा मन,भावना और मानसिक स्थिति का कारक ग्रह है तो स्वाभाविक रूप से विचार आता है कि मनुष्य के मन की अवस्थाएं भी तो घटती बढ़ती रहती हैं। चंद्रमा की षोडश कलाएं वस्तुत: मन की ही तो विविध दशाओं की प्रतीक हैं।
शरद पूर्णिमा की खीर मिट्टी के पात्र में रखने का महत्व
शरद पूर्णिमा की खीर बनाकर मिट्टी के पात्र में चन्द्रमा की चांदनी में रखना चाहिए और मिट्टी के पात्र में एक चांदी का सिक्का डाल देना चाहिए, चांदी चन्द्रमा की धातु है और चांदी से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
चांदी और चंद्रमा का संबंध
चांदी और चंद्रमा का गहरा संबंध है, जहाँ चांदी को चंद्रमा की धातु माना जाता है और यह मन की शांति, स्थिरता और भावनात्मक संतुलन प्रदान करती है।