Ashwin Purnima Vrat Rules: हिंदू धर्म में आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी समस्त 16 कलाओं से युक्त होकर अमृत की वर्षा करता है और धन की देवी मां लक्ष्मी स्वयं पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं।
इस वर्ष शरद पूर्णिमा की तिथि को लेकर लोगों के मन में थोड़ा संशय बना हुआ है कि व्रत, शरद पूर्णिमा का व्रत और स्नान-दान एक ही दिन होगा या अलग-अलग। पंचांग के अनुसार, आश्विन पूर्णिमा तिथि 25 अक्तूबर को दोपहर 11:55 बजे शुरू होगी और 26 अक्तूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी।
ऐसे में शरद पूर्णिमा का व्रत चंद्रोदय व्यापिनी तिथि के आधार पर 25 अक्टूबर को रखा जाएगा, जबकि स्नान और दान की परंपरा 26 अक्टूबर को निभाई जाएगी। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से समझते हैं।