शनि प्रदोष व्रत कथा
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शनि प्रदोष व्रत कथा
पुराने समय की बात है, एक गरीब ब्राह्मण परिवार अत्यंत कष्टों के बीच अपना जीवन बिता रहा था। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि ब्राह्मण की पत्नी को अपने दोनों पुत्रों के साथ भिक्षा मांगकर गुजारा करना पड़ता था। एक दिन भटकते-भटकते वे ऋषि शाण्डिल्य के आश्रम पहुंच गए। उनकी दयनीय स्थिति देखकर ऋषि का हृदय द्रवित हो उठा। उन्होंने पूछा, “हे देवी, तुम इतनी दुखी और व्याकुल क्यों हो?”
ब्राह्मण की पत्नी ने विनम्रता से उत्तर दिया, “हे मुनिवर, हमारा जीवन अत्यंत कठिनाइयों में बीत रहा है। हम गरीबी से जूझ रहे हैं। मेरा बड़ा पुत्र वास्तव में एक राजकुमार है, जिसका नाम धर्म है। दुर्भाग्यवश, उसके पिता का राज्य उससे छिन गया और तब से वह मेरे साथ ही रह रहा है। मेरा छोटा पुत्र शुचिव्रत बहुत ही सरल और धर्मपरायण है। कृपया हमें ऐसा उपाय बताइए जिससे हमारे जीवन में सुख और समृद्धि आ सके।”