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शनि प्रदोष व्रत 2019: शादी में आ रही अड़चने, इस व्रत को करने से हो जाएंगी दूर

Sat, 09 Nov 2019 09:06 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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प्रदोष व्रत भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए किया जाता है
प्रत्येक महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत का नियम है। प्रदोष व्रत भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए किया जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि वार के अनुसार प्रदोष व्रत का अलग-अलग फल मिलता है। शनिवार के दिन जब प्रदोष व्रत पड़ता है तब शनि प्रदोष व्रत कहलता है। शनिवार और मंगलवार के प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। नौ नवंबर यानी कल शनिवार है। जिसमें  शनि प्रदोष व्रत का शुभ संयोग बन रहा है।

 
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सूर्यास्त से रात्रि आरंभ होने तक का समय प्रदोष काल कहलाता है

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भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्यास्त से रात्रि आरंभ होने तक का समय प्रदोष काल कहलाता है। इस समय भगवान शिव की पूजा करने से भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। इसका कारण यह माना जाता है कि त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय इनकी पूजा करने से शिव अति प्रसन्न होते हैं।

 
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शिव की पूजा से शनि ग्रह के अशुभ ग्रहों के प्रभाव में कमी आती है

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संध्या के समय हनुमान चालीसा के पाठ का भी कई गुणा लाभ मिलता है - फोटो : shiv
शनि प्रदोश व्रत के दिन शिव की पूजा करने से शनि ग्रह के कारण प्राप्त होने वाले अशुभ ग्रहों के प्रभाव में कमी आती है। आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है और शरीर उर्जावान एवं शक्तिशाली होता है। शनिवार के दिन प्रदोष व्रत होने से इस दिन संध्या के समय हनुमान चालीसा के पाठ का भी कई गुणा लाभ मिलता है।

 

वैवाहिक जीवन सुखमय बनाने के लिए यह व्रत विशेष लाभदायी होता है

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वैवाहिक जीवन
ग्रह दोषों के कारण जिनकी शादी में बार-बार बाधा आ रही है, अथवा वैवाहिक जीवन में आपसी तालमेल में कमी है, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभदायी होता है। शनि के प्रभाव को कम करने के लिए इस दिन मसूर की दाल, लाल वस्त्र, गुड़, तांबा का दान करना उत्तम फलदायी होता है।

 
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हनुमान जी को बूंदी अर्पित करके लोगों में प्रसाद बांटें

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हनुमान जी
शनि की शांति के लिए जो लोग प्रदोष व्रत करना चाहते हैं, उनके लिए नियम यह है कि पूरे दिन व्रत रखकर शाम के समय भगवान शिव एवं हनुमान जी की पूजा करें। हनुमान जी को बूंदी के लड्डू अथवा बूंदी अर्पित करके लोगों में प्रसाद बांटें। इसके बाद भोजन करें।
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