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Shani Jayanti 2026: शनिदेव को तेल चढ़ाते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें क्या है सही तरीका

Fri, 15 May 2026 06:20 PM IST
Megha Kumari धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shani Jayanti 2026: शनि जयंती पर शनि देव की पूजा और उन्हें तेल चढ़ाना शुभ होता है। इससे जीवन में चल रही परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। साथ ही दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव भी कम होने लगता है।
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Shani Jayanti 2026 - फोटो : अमर उजाला AI
Shani Jayanti 2026: इस साल 16 मई 2026 को देशभर में शनि जयंती का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन न्याय और कर्मफल के देवता शनि देव का जन्म हुआ था। शास्त्रों की मानें, तो यह ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि है, जिस पर शनि देव की पूजा करना बेहद लाभकारी होता है। इससे सभी दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होने लगता है। इसके अलावा शनि जयंती पर जहां पूजा-पाठ व दान-दक्षिणा का विधान है, वहीं शनि देव को तेल अर्पित करना भी बेहद शुभ माना गया है। मान्यता है कि, इससे मानसिक तनाव कम होता है और व्यक्ति को राहत महसूस होने लगती है। हालांकि, तेल चढ़ाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी माना गया है, वरना पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। आइए इसके नियमों को विस्तार से जानते हैं।
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Shani Jayanti 2026 - फोटो : freepik
क्या है शनिदेव को तेल चढ़ाने का सही तरीका ?
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि जयंती के दिन सरसों का तेल अर्पित करना सबसे शुभ माना जाता है। इस समय मन को शांत रखें और श्रद्धा के साथ शनि देव का स्मरण करें। पूजा के दौरान ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करना भी लाभकारी माना जाता है।
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Shani Jayanti 2026 - फोटो : अमर उजाला
  • शनिदेव को कभी भी इस्तेमाल किया हुआ या बचा हुआ तेल अर्पित नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से पूजा का शुभ फल कम हो सकता है। इसलिए हमेशा साफ और शुद्ध सरसों के तेल का ही प्रयोग करें।

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Shani Jayanti 2026 - फोटो : freepik
  • ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शनि देव की मूर्ति पर सीधे तेल डालना उचित नहीं माना जाता है। तेल को किसी पात्र में अर्पित करना अधिक शुभ होता है।  कई स्थानों पर शनि शिला या चरणों में तेल अर्पित करने की परंपरा भी होती हैं।
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Shani Jayanti 2026 - फोटो : अमर उजाला
  • कहते हैं कि, शनिदेव को तेल चढ़ाते समय तांबे के बर्तन का उपयोग करने से बचना चाहिए। आप लोहे, मिट्टी या स्टील के पात्र में तेल अर्पित कर सकते हैं।
  • शनि जयंती के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना भी बेहद फलदायी माना गया है। मान्यता है कि, इससे शनि दोष शांत होने लगते हैं और साढ़ेसाती का प्रभाव कम होता है।
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Shani Jayanti 2026 - फोटो : Amar Ujala
शनि जयंती 2026 पूजा मुहूर्त
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को सुबह 05 बजकर 11 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 17 मई को देर रात 01 बजकर 30 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, इस वर्ष शनि जयंती 16 मई 2026, शनिवार के दिन मनाई जाएगी। पूजा के लिए शुभ समय शाम 7 बजकर 5 मिनट से रात 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।

शनि गायत्री मंत्र
ॐ शनैश्चराय विदमहे छायापुत्राय धीमहि ।

शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।

शनि स्तोत्र
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।  
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