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Sawan Shivratri 2026: सावन शिवरात्रि पर घर में इस विधि से करें पूजा, जानें सामग्री से लेकर पारण तक की जानकारी

Tue, 11 Aug 2026 12:58 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Sawan Shivratri 2026: वर्ष 2026 में यह व्रत 11 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं और रात्रि के चारों प्रहर में विधिपूर्वक पूजा करते हैं।
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Sawan Shivratri 2026 - फोटो : AI
Sawan Shivratri 2026: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। इस पूरे मास में श्रद्धालु शिव आराधना, व्रत और जलाभिषेक के माध्यम से भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। इसी दौरान आने वाली सावन शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 11 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं और रात्रि के चारों प्रहर में विधिपूर्वक पूजा करते हैं।

मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर सच्चे मन से की गई पूजा से व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है। इस पर्व की खास बात यह है कि दिन के साथ-साथ रात्रि पूजा को भी विशेष महत्व दिया गया है, जो इसे अन्य व्रतों से अलग बनाता है।
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सावन शिवरात्रि का पौराणिक महत्व - फोटो : freepik
सावन शिवरात्रि का पौराणिक महत्व
  • सावन शिवरात्रि का संबंध समुद्र मंथन की प्रसिद्ध कथा से जोड़ा जाता है। पुराणों के अनुसार, जब मंथन के दौरान हलाहल विष निकला, तो उसकी तीव्रता से पूरी सृष्टि संकट में आ गई। तब भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका गला नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए।
  • कहा जाता है कि विष की तपन को शांत करने के लिए देवताओं ने शिवलिंग पर जल अर्पित किया था। इसी कारण सावन में जलाभिषेक की परंपरा विशेष मानी जाती है।
  • एक अन्य मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने कठोर तप कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसलिए इस दिन शिव-पार्वती की पूजा वैवाहिक सुख और संबंधों की मजबूती से भी जुड़ी मानी जाती है।
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सावन शिवरात्रि की पूजा सामग्री - फोटो : Amar Ujala
सावन शिवरात्रि की पूजा सामग्री
पूजा से पहले सभी आवश्यक सामग्री तैयार कर लेना उचित होता है। अभिषेक के लिए गंगाजल, स्वच्छ जल, दूध, दही, शहद और घी रखा जाता है। इसके साथ ही चंदन, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र और भस्म का उपयोग किया जाता है।
आरती के लिए धूप, दीपक, कपूर और घी या तेल का प्रबंध रखें। भोग में फल या मिठाई अर्पित की जा सकती है। बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि वह खंडित न हो।

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सावन शिवरात्रि व्रत के नियम - फोटो : adobe stock
सावन शिवरात्रि व्रत के नियम
  • यह व्रत केवल भोजन त्याग तक सीमित नहीं है, बल्कि मन और व्यवहार की शुद्धता भी उतनी ही जरूरी मानी जाती है। इस दिन सात्विक जीवनशैली अपनाने, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
  • व्रत के दौरान फलाहार किया जाता है, जिसमें दूध, फल और पानी शामिल हो सकते हैं। अनाज, नमक, प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए।
  • रात्रि जागरण भी इस व्रत का अहम हिस्सा है, जिसमें भक्त मंत्र जाप और भजन के माध्यम से भगवान शिव का ध्यान करते हैं।
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चार प्रहर की पूजा - फोटो : AI
सावन शिवरात्रि पूजा विधि 
  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। 
  • पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करें। 
  • फिर दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें और अंत में साफ जल चढ़ाएं।
  • भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन, अक्षत और सफेद पुष्प अर्पित करें। 
  • इसके बाद फल और मिठाई का भोग लगाएं। 
  • ‘ॐ नमः शिवाय’ और महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जप करें तथा शिव चालीसा का पाठ करें। 
  • अंत में शिव-पार्वती की आरती कर आशीर्वाद प्राप्त करें।
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सावन शिवरात्रि व्रत पारण - फोटो : adobe
चार प्रहर की पूजा
पहला प्रहर: शाम 7:04 बजे से रात 9:45 बजे तक
दूसरा प्रहर: रात 9:45 बजे से 12:26 बजे तक
तीसरा प्रहर: रात 12:26 बजे से सुबह 3:07 बजे तक
चौथा प्रहर: सुबह 3:07 बजे से 5:49 बजे तक
मान्यता है कि चारों प्रहर में पूजा करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। यदि सभी प्रहरों में पूजा संभव न हो, तो निशिता काल में पूजा करना भी शुभ माना जाता है।

सावन शिवरात्रि व्रत पारण
सावन शिवरात्रि का व्रत अगले दिन सुबह स्नान और पूजा के बाद खोला जाता है। पारण से पहले भगवान शिव की सामान्य पूजा करें और फिर सात्विक भोजन ग्रहण करें। इस दौरान साबूदाना या कुट्टू के आटे से बने व्यंजन लिए जा सकते हैं।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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