फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pradosh Vrat 2025: सावन के आखिरी प्रदोष पर इस उपाय से करें महादेव को प्रसन्न, मिलेंगे कई अद्भुत लाभ

Tue, 05 Aug 2025 05:52 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

August Pradosh Vrat 2025: हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। सावन माह के शुक्ल पक्ष में यह तिथि 6 अगस्त 2025 को दोपहर 2 बजकर 8 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 7 अगस्त को दोपहर 2:27 मिनट पर है।
विज्ञापन
1 of 7
Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
August Pradosh Vrat 2025: हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। सावन माह के शुक्ल पक्ष में यह तिथि 6 अगस्त 2025 को दोपहर 2 बजकर 8 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 7 अगस्त को दोपहर 2:27 मिनट पर है। चूंकि प्रदोष व्रत में महादेव की उपासना प्रदोष काल में की जाती हैं, इसलिए 6 अगस्त 2025 को सावन का अंतिम प्रदोष व्रत है। यह दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की उपासना को समर्पित है। मान्यता है कि इस तिथि पर की गई उपासना से महादेव शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। यह दिन कन्याओं के लिए और भी महत्वपूर्ण है। इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भाग्योदय और मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा पूरी होती हैं। हालांकि शिव पूजन में  'शिव चालीसा' का पाठ करना अत्यधिक लाभकारी होता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के कष्ट, रोग, तनाव दूर होते हैं। ऐसे में आइए इस शक्तिशाली चालीसा के पाठ को जानते हैं।
विज्ञापन

2 of 7
Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
शिव चालीसा पाठ के लाभ
  • सुखी दांपत्य
  • संतान सुख और संतान प्राप्ति
  • प्रेम जीवन मधुरमय
  • सफलता और विजय
  • भाग्य में वृद्धि
विज्ञापन

3 of 7
Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
  • डर भय की समाप्ति
  • कल्याण और मोक्ष मिलता है
  • धन लाभ के योग
  • साधक के स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
  • मनचाहा जीवनसाथी

4 of 7
Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
शिव चालीसा 

॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥

॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ 

मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥ 

देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ 

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ 

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ 

एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ 

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥ 

धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥ 

नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ 

पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ 

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

॥ दोहा ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण ॥
विज्ञापन

5 of 7
Pradosh Vrat 2025 - फोटो : Instagram
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||
विज्ञापन

6 of 7
Pradosh Vrat 2025 - फोटो : adobe
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
Pradosh Vrat 2025 - फोटो : adobe
करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा ।
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं ।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व ।
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥



 

Raksha Bandhan 2025: भद्राकाल में क्यों नहीं बांधी जाती भाई की कलाई पर राखी और जानिए कौन है भद्रा ?


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें