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Pradosh Vrat 2025: कब है सावन का अंतिम प्रदोष व्रत ? जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

Tue, 29 Jul 2025 05:56 PM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Pradosh Vrat 2025: इस साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 6 अगस्त को दोपहर 02 बजकर 08 मिनट पर होगी। इसका समापन 7 अगस्त को दोपहर 02 बजकर 27 मिनट पर होगा।
 
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Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
Pradosh Vrat 2025: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को महादेव की पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस तिथि पर शिवलिंग पर केवल जल और बेलपत्र चढ़ाने से साधक के कष्ट दूर होते हैं। यही नहीं व्यक्ति मानसिक रूप से भी स्वस्थ महसूस करता है। यह व्रत हर माह के शुक्ल व कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। हालांकि सावन में पड़ने वाली त्रयोदशी सभी में खास है, क्योंकि यह महादेव का प्रिय माह है। इस समय प्रदोष रखने से साधक को आध्यात्मिक लाभ सहित कर्ज, रोग और तनाव से भी मुक्ति मिलती हैं। चूंकि सावन में देवी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न शिव जी ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था, इसलिए यह समय प्रभु की कृपा पाने का शानदार अवसर है। इस दौरान 22 जुलाई को सावन का पहला प्रदोष व्रत रखा जा चुका है। परंतु अतिंम प्रदोष कब है, आइए जानते हैं
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Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
कब है सावन का आखिरी प्रदोष व्रत
इस साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 6 अगस्त को दोपहर 02 बजकर 08 मिनट पर होगी। इसका समापन 7 अगस्त को दोपहर 02 बजकर 27 मिनट पर होगा। ऐसे में 6 अगस्त को सावन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
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Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
पूजा मुहूर्त
इस साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पूजा का शुभ समय शाम 07 बजकर 08 मिनट से शुरू होगा। यह रात 9 बजकर 16 मिनट तक बना रहेगा। आप इस अवधि में महाकाल की उपासना कर सकते हैं।

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Pradosh Vrat 2025 - फोटो : Instagram
पंचांग
  • सूर्योदय - सुबह 05 बजकर 45 मिनट पर
  • सूर्यास्त - शाम 07 बजकर 08 मिनट पर
  • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 20 मिनट से 05 बजकर 03 मिनट तक
  • निशिता मुहूर्त - रात 12 बजकर 06 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक
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Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत पूजा विधि
  • प्रदोष व्रत की पूजा विशेष तौर पर प्रदोष काल में की जाती है। इसलिए शाम को पूजा से पूर्व स्नान करें।
  • साफ वस्त्रों को धारण करें और घर में गंगाजल का छिड़काव कर लें।
  • सबसे पहले एक चौकी लेकर उसपर शिव परिवार की मूर्ति या तस्वीर स्थापित कर लें।
  • फिर शिवलिंग स्थापित करें और  जल, शहद, दूध, दही से अभिषेक करें।
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Pradosh Vrat 2025 - फोटो : adobe
  • अब आप शिवलिंग पर बेलपत्र और शमी के फूल चढ़ाएं।
  • फिर शुद्ध देसी घी से दीप जलाकर
  • ॐ नमः शिवाय और ॐ त्र्यम्बकं यजामहे जैसे शिव मंत्रों का स्मरण करें।
  • पूजा के बाद, प्रदोष व्रत की कथा सुने और शिव जी की आरती करें।
  • अंत में अपनी क्षमतानुसार दान करें और भूल की क्षमा मांगें।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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