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Sawan Somwar 2024: शुभ योग में सावन का तीसरा सोमवार आज, इस विधि से करें भगवान शिव की पूजा

Mon, 05 Aug 2024 06:05 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सावन का तीसरा सोमवार आज - फोटो : अमर उजाला
Sawan 3rd Somwar 2024: सावन का तीसरा सोमवार व्रत आज यानी 5 अगस्त 2024 को रखा जा रहा है। ये दिन देवों के देव महादेव को अति प्रिय है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में खुशियों का वास होता है। साथ ही सभी बिड़गे कार्य भी बनने लगते हैं। ऐसे में महादेव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक व अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने पर मनचाहे परिणामों की प्राप्ति होती है। साथ ही धन लाभ के योग बनते हैं।

आज यानी सावन के तीसरे सोमवार पर व्यतीपात योग सुबह 10: 38 ए एम तक रहने वाला है, उसके बाद से वरीयान प्रारंभ हो जाएगा। वहीं इस दिन उपवास रखने का भी विधान है। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं। इस दौरान भगवान शिव की पूजा का खास महत्व होता है, इसलिए पूजा को हमेशा संपूर्ण विधि के साथ करना चाहिए। इसी कड़ी में आइए भगवान भोलेनाथ की पूजा विधि, आरती और कुछ खास मंत्रों के बारे में जान लेते हैं।
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सावन का तीसरा सोमवार आज - फोटो : freepik
पूजन विधि
सावन के तीसरे सोमवार पर सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। फिर साफ वस्त्रों को धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर जाकर सबसे पहले विधिपूर्वक भगवान शिव का अभिषेक करें। फिर उन्हें फल, पुष्प, धूप, बेलपत्र, अक्षत आदि चीजें अर्पित करते जाएं। इसके बाद घी का दीपक जलाएं।

सभी चीजों को अर्पित करने के बाद अंत में शिव जी की आरती करें। इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर महादेव से सुख-समृद्धि की कामना करें। इस दौरान दान करना अधिक शुभ होता है। आप अपनी श्रद्धानुसार जरूरतमंद लोगों को दान करें।
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सावन का तीसरा सोमवार आज - फोटो : freepik
अर्पित करें ये चीजें
सावन के तीसरे सोमवार पर शिवलिंग पर शहद चढ़ाना चाहिए। इससे व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा बेलपत्र चढ़ाने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति के योग बनते हैं। माना जाता है कि भगवान शिव को शुद्ध घी, गंगाजल, धतूरा, चंदन और फल जरूर अर्पित करना चाहिए। 

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सावन का तीसरा सोमवार आज - फोटो : freepik
जरूर करें ये 3 उपाय
  • सावन के तीसरे सोमवार पर गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करें। माना जाता है कि इससे सफलता के योग का निर्माण होता है।
  • सावन के तीसरे सोमवार पर महादेव को केसर अर्पित करें। ऐसा करने से नौकरी-व्यापार में लाभ की संभावना बढ़ जाती है।
  • इस दौरान जरूरतमंदों को भोजन कराने से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
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सावन का तीसरा सोमवार आज - फोटो : freepic
भगवान शिव की आरती 
जय शिव ओंकारा ऊँ जय शिव ओंकारा । 
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
एकानन चतुरानन पंचानन राजे। 
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। 
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी। 
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। 
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता । 
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। 
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी। 
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे । 
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
जय शिव ओंकारा हर ऊँ शिव ओंकारा। 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ऊँ जय शिव ओंकारा...॥  
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सावन का तीसरा सोमवार आज - फोटो : free pic
भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।
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सावन का तीसरा सोमवार आज - फोटो : freepik
शिव चालीसा 

॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥

॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ 

मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥ 

देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ 

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ 

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ 

एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ 

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥ 

धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥ 

नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ 

पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ 

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

॥ दोहा ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण ॥

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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