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Sawan 2021: 26 जुलाई को शिव पूजा के लिए अतिश्रेष्ठ श्रावण का पहला सोमवार

Tue, 20 Jul 2021 04:14 PM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली

सार

  • भगवान रूद्र को भस्म, लाल चंदन, रुद्राक्ष, आक का फूल, धतूरा फल, बिल्व पत्र और भांग विशेष रूप से प्रिय हैं अतः इन्ही पदार्थों से श्रावण सोमवार को शिवपूजन करें।
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सावन सोमवार पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला
शिव शक्ति की आराधना करके जीवन में सभी संकल्प पूर्ण कराने में सक्षम श्रावण माह 25 जुलाई से आरंभ हो रहा है उनमें भी महापुण्यफल दायक श्रावण सोमवार 26 जुलाई को है। सनातन धर्म में सृष्टि संहार के स्वामी श्रीरूद्र की उपासना के लिए श्रावण माह को सर्वाधिक प्रभावशाली और पुण्य फलदाई माना गया है, किन्तु इनमें भी यदि सोमवार हो तो और भी श्रेष्ठ मना गया है। ऐसे में भक्तों को इस दिन शिव उपासना अथवा रुद्राभिषेक का कोई भी सुअवसर खोना नहीं चाहिए।

शिवः अभिषेक प्रिय
सम्पूर्ण श्रावण माह में शिव-शक्ति पृथ्वी पर ही निवास करते हैं अतः सभी देव-दनुज, नाग, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, शिवगण, शिव भक्त आदि 'शिवः अभिषेक प्रियः, श्रावणे पूजयेत शिवम्' आदि-आदि सूक्तिओं के संकेत से भगवान रूद्र की आराधना एवं अभिषेक करते हैं। इस माह के आरम्भ होते ही शिवभक्त कांवडि़ये हरिद्वार, ऋषिकेश और गोमुख से गंगाजल भरकर कांवड़ उठाये अपने-अपने घर को लौटते हैं। मार्ग में इन शिवभक्तों द्वारा ॐ नमः शिवाय, बोल बं, 'बम-बम भोले' आदि के उद्घोष से पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है। वेदों के अनुसार 'मुमुक्षुः तीर्थ वारिणाः'। श्रावण में किसी भी तीर्थजल, समुद्र्जल, गंगाजल से अभिषेक करवाना शिव को अतिशय प्रिय है, किन्तु गंगाजल के द्वारा भगवान शंकर का अभिषेक सर्वोत्तम माना गया है।

भावी मेट सकहिं त्रिपुरारी
सभी विज्ञों ऋषियों-मुनियों का कहना है कि 'भावी मेट सकहिं त्रिपुरारी। अर्थात- ब्रह्मा द्वारा प्राणियों के भाग्य में लिखा गया त्रिबिध दुःख (दैहिक दैविक और भौतिक) भी भगवान शिव ही समाप्त कर सकते हैं। जो श्रद्धालु मंदिर नहीं जा पाते हैं, वे घर में ही रखे शिव परिवार का अभिषेक कर सकते हैं। सभी गृहस्थ शिवभक्तों को इस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि घर में दो शिवलिंग न हों और अभिषेक करने के समय शिव परिवार के सभी सदस्य, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी एवं आभूषण नागदेवता सभी शिवलिंग के चारों ओर विराजमान रहें। वैरागियों, साधु संतों, बाल ब्रह्मचारियों, घर-पारिवार से मुक्त शिवभक्तों के लिए ऐसा करना अनिवार्य नहीं है, वे केवल शिवलिंग की ही पूजा कर सकते हैं। उनके लिए कहा गया है कि 'शिवलिंगेपि सर्वेषां देवानां पूजनं भवेत' अर्थात शिवलिंग पर ही सभी देवों का भी अभिषेक करें।

शुक्ल यजुर्वेद में विभिन्न द्रव्यों से भगवान शिव का अभिषेक करने का फल बताया गया है। गन्ने के रस से शीघ्र विवाह श्री एवं धन प्राप्ति, शहद कर्जमुक्ति एवं पूर्ण पति का सुख, दही से पशुधन की वृद्धि, कुश एवं जल से आरोग्य शरीर, मिश्री एवं दूध से उत्तम विद्या प्राप्ति, कच्चे दूध से पुत्र सुख और गाय के घी द्वारा रुद्राभिषेक करने पर सर्वकामना पूर्ण होती है। भगवान रूद्र को भस्म, लाल चंदन,रुद्राक्ष, आक का फूल, धतूरा फल, बिल्व पत्र और भांग विशेष रूप से प्रिय हैं अतः इन्ही पदार्थों से श्रावण सोमवार को शिवपूजन करें।
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