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Sarva Pitru Amavasya 2020: सर्व पितृ अमावस्या जानें पितरों के लिए कैसे बनी यह तिथि सबसे महत्वपूर्ण

Sun, 06 Sep 2020 06:20 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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सर्व पितृ अमावस्या 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
सर्व पितृ अमावस्या 17 सितंबर को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की अमावस्या तिथि को सर्व पितृ अमावस्या के नाम से जाना जाता है। श्राद्ध कर्म में इस तिथि का बड़ा महत्व माना गया है। शास्त्रों में इसे मोक्षदायिनी अमावस्या कहा गया है। आइए जानते हैं पितरों के तर्पण के लिए यह तिथि सबसे महत्वपूर्ण क्यों है। 
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सर्व पितृ अमावस्या 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
अमावस्या तिथि मनुष्य की जन्मकुंडली में बने हुए पितृदोष-मातृदोष से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ तर्पण, पिंडदान एवं श्राद्ध के लिए अक्षय फलदायी मानी गई है। शास्त्रों में इस तिथि को 'सर्वपितृ श्राद्ध' तिथि भी माना गया है। इसके पीछे एक महत्वपूर्ण घटना है। 
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सर्व पितृ अमावस्या 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
देवताओं के पितृगण 'अग्निष्वात्त' जो सोमपथ लोक मे निवास करते हैं। उनकी मानसी कन्या, 'अच्छोदा' नाम की एक नदी के रूप में अवस्थित हुई। एक बार अच्छोदा ने एक हज़ार वर्ष तक निर्बाध तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर दिव्यशक्ति परायण देवताओं के पितृगण 'अग्निष्वात्त' अच्छोदा को वरदान देने के लिए दिव्य सुदर्शन शरीर धारण कर आश्विन अमावस्या के दिन उपस्थित हुए।

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सर्व पितृ अमावस्या 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
उन पितृगणों में 'अमावसु' नाम की एक अत्यंत सुंदर पितर की मनोहारी-छवि यौवन और तेज देखकर अच्छोदा कामातुर हो गयी और उनसे प्रणय निवेदन करने लगीं किन्तु अमावसु अच्छोदा की कामप्रार्थना को ठुकराकर अनिच्छा प्रकट की, इससे अच्छोदा अति लज्जित हुई और स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरी।
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सर्व पितृ अमावस्या 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
अमावसु के ब्रह्मचर्य और धैर्य की सभी पितरों ने सराहना की एवं वरदान दिया कि यह अमावस्या की तिथि 'अमावसु' के नाम से जानी जाएगी। जो प्राणी किसी भी दिन श्राद्ध न कर पाए वह केवल अमावस्या के दिन श्राद्ध-तर्पण करके सभी बीते चौदह दिनों का पुण्य प्राप्त करते हुए अपने पितरों को तृप्त कर सकते हैं। तभी से प्रत्येक माह की अमावस्या तिथि को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है और यह तिथि 'सर्वपितृ श्राद्ध' के रूप में भी मनाई जाती है। 
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सर्व पितृ अमावस्या - फोटो : सोशल मीडिया
सर्व पितृ अमावस्या 2020 तिथि मुहूर्त 
अमावस्या तिथि प्रारम्भ: 16 सितंबर को शाम 07:56
अमावस्या तिथि समाप्त: 17 सितंबर को शाम 04:29
कुतुप मूहूर्त: सुबह 11:51 से 12:40 तक
रौहिण मूहूर्त: दोपहर 12:40 से 1:29 तक
अपराह्न काल: दोपहर 1:29 से 3:56 तक
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