फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sankashti Chaturthi 2019: जानिए कैसे करें प्रथम पूजनीय गणपति महाराज को खुश

Fri, 15 Nov 2019 09:14 AM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 7
शुभ कार्यों से पहले भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है - फोटो : ganesh chaturthi 2019
सभी तरह के शुभ कार्यों से पहले भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी की विधि पूर्वक पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। 
अगली स्लाइड्स में जानिए संकट चतुर्दशी की पूजा विधि, मंत्र और गणपति पूजन की सामग्री...
 
विज्ञापन

2 of 7
हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है
कब होती है संकष्टी चतुर्थी
हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। जो चतुर्थी पूर्णिमा के बाद आती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं और जो चतुर्थी तिथि अमावस्या के बाद आती है उसे विनायक चतुर्थी कहते हैं।

 
विज्ञापन

3 of 7
गणपति जी की आराधना - फोटो : ANI
संकष्टी चतुर्थी, व्रत लाभ
संकष्टी चतुर्थी के पावन दिन गणपति जी की आराधना करने से विशेष वरदान प्राप्त होता है और सभी तरह की समस्याएं दूर हो जाती हैं।
 

4 of 7
संकट चतुर्दशी
कब है संकट चतुर्दशी
इस महीने शुक्रवार,15 नवंबर को संकष्टी चतुर्थी है।
 
विज्ञापन

5 of 7
भगवान गणेश की पूजा
संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं और स्नान करके साफ लाल, पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए। भगवान गणपति की प्रतिमा पर लाल रंग के कपड़े पहनाएं और भगवान गणेश की पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुंह करना चाहिए। भगवान गणपति को लाल गुलाब के फूल चढ़ाएं और उनकी प्रतिमा के सामने दिया जलाएं। भगवान गणेश की पूजा में गणेश जी को तिल के लड्डू और मोदक का भोग लगाएं।
 
विज्ञापन

6 of 7
गणपति पूजन
गणपति पूजन की सामग्री
श्री गणपति पूजन के लिए सुंदर सी पीतल की थाली में पुष्प, दीप, धूप, चंदन, कपूर, मौली, रोली, कुमकुम, अक्षत, दूर्वा, पान और मोदक, यह सामग्री एकत्रित कर लें।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
गणपति महाराज
गण मंत्र : "ॐ भालचन्द्राय नमः"
यह मंत्र गणपति महाराज को समर्पित है। इस मंत्र के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में निराशा नहीं रहती है। कोई भी अप्रिय घटना नहीं घटती है। इस मंत्र के जाप से घर में खुशहाली का वातावरण बना रहता है। व्यक्ति प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति करता है। व्यक्ति के शरीर की सुंदरता बढ़ती है और मनोवांछित फल प्राप्त होता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें