सकट चौथ व्रत कथा
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इसके बाद राजा ने बलि की प्रथा को तुरंत समाप्त कर दिया। नगरवासियों ने सकट माता की शक्ति और करुणा को स्वीकार किया। तभी से सकट चौथ का पर्व माताएं श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाने लगीं। इस दिन माताएं अपनी संतान की रक्षा और सुखी जीवन के लिए सकट माता से प्रार्थना करती हैं।
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