Sakat Chauth Vrat Katha :{इस वर्ष सकट चौथ, जिसे तिल चौथ के नाम से भी जाना जाता है, 17 जनवरी को मनाई जाएगी। इस पावन दिन भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसे में आइए जानते हैं सकट चौथ व्रत के नियम, पूजा विधि, पूजा सामग्री और शुभ मुहूर्त के बारे में सम्पूर्ण जानकारी।
Sakat Chauth Puja Samagri In Hindi: इस वर्ष सकट चौथ, जिसे तिल चौथ के नाम से भी जाना जाता है, 17 जनवरी को मनाई जाएगी। इस पावन दिन भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को रखने से संतान के लिए लंबी आयु, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसे तिलकुट चौथ, माघ संकष्टी चतुर्थी आदि नामों से भी पुकारा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं सकट चौथ व्रत के नियम, पूजा विधि, पूजा सामग्री और शुभ मुहूर्त क्या है। साथ ही जानेंगे कि सकट चौथ की व्रत कथा और पौराणिक महत्व...
सकट चौथ व्रत की सही तिथि
हिन्दू पंचांग के अनुसार, सकट चौथ का व्रत हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है। इस साल 2025 में सकट चौथ का व्रत 17 जनवरी को रखा जाएगा।
सकट चौथ 2025 शुभ मुहूर्त
लाभ मुहूर्त: सुबह 8:34 से 9:53 तक
अमृत मुहूर्त: सुबह 9:53 से 11:12 तक
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सकट चौथ 2025
- फोटो : amar ujala
सकट चौथ व्रत रखने के नियम
सकट चौथ के दिन भगवान गणेश को उनके हरे रंग के ही कपड़े पहनाना चाहिए।
सकट चौथ के दिन भगवान गणेश को तिलकुट का भोग लगाना न भूलें।
इस दिन तिल से बनी चीजों, तिल के लड्डू या तिल से बनी मिठाई का भोग लगाया जा सकता है।
सकट चौथ के दिन चंद्रमा को जल अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।
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सकट चौथ पूजा सामग्री
गणेश जी की प्रतिमा, लाल फूल, 21 गांठ दूर्वा, जनेऊ, सुपारी पान का पत्ता, सकट चौथ की पूजा के लिए लकड़ी की चौकी
पीला कपड़ा, लौंग, रोली, अबीर, गुलाल, गाय का घी, दीप, धूप, गंगाजल, मेहंदी, सिंदूर, इलायची, अक्षत, हल्दी, मौली, गंगाजल, 11 या 21 तिल के लड्डू, मोदक, फल, कलश, चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए दूध, चीनी आदि, इत्र, सकट चौथ व्रत कथा की पुस्तक।
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संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को शुद्ध करें और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र को एक साफ स्थान पर स्थापित करें। भगवान गणेश को दुर्वा, फूल, शमी पत्र ,चंदन और तिल से बने लड्डू अर्पित करें। पूजा के दौरान दीपक जलाएं और भगवान गणेश के मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें। पूजा के बाद गणेश आरती करें और तिल व गुड़ से बने प्रसाद का भोग लगाएं। संध्या के समय चंद्रमा को देखकर जल से अर्घ्य अर्पित करें और भगवान गणेश से अपने परिवार के सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्रार्थना करें। चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें और प्रसाद ग्रहण करें।
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सकट चौथ व्रत कथा
सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश को समर्पित है और इसे सच्चे मन से करने पर संतान सुख और कष्टों से मुक्ति का वरदान मिलता है। व्रत के साथ सकट चौथ की कथा सुनना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने कार्तिकेय और गणेशजी से पूछा कि कौन देवताओं के कष्ट दूर कर सकता है। इस पर दोनों ने स्वयं को इस कार्य के लिए योग्य बताया। शिवजी ने कहा कि जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटेगा, वही यह कार्य करेगा। कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर परिक्रमा के लिए निकल गए। इस दौरान गणेशजी ने विचार किया कि उनका वाहन चूहा है, जो पूरे पृथ्वी की परिक्रमा करने में अधिक समय लेगा। तब उन्होंने एक उपाय सोचा और अपने माता-पिता शिव और पार्वती की सात बार परिक्रमा करके वापस बैठ गए। जब कार्तिकेय लौटे, तो उन्होंने स्वयं को विजयी बताया।
भगवान शिव ने गणेशजी से पूछा कि उन्होंने पृथ्वी की परिक्रमा क्यों नहीं की। गणेशजी ने उत्तर दिया कि माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक विद्यमान हैं। उनके उत्तर से शिवजी प्रसन्न हुए और उन्हें देवताओं के कष्टों का निवारण करने का आशीर्वाद दिया। साथ ही, यह भी कहा कि जो व्यक्ति चतुर्थी के दिन श्रद्धा से उनकी पूजा करेगा और चंद्रमा को अर्घ्य देगा, उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। सकट चौथ व्रत का यह पर्व आस्था, संतान के कल्याण और भगवान गणेश की कृपा पाने का प्रतीक है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।