रूप चौदस की कथा
एक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी असुर नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कराया था तब से इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। वहीं एक दूसरी मान्यता के अनुसार जब रंती देव नामक राजा के मृत्यु का समय समीप आया तो यमदूत आ खड़े हुए। यमदूत को देखकर राजा बोले मैंने तो अपने जीवन में कभी कोई पाप नहीं किया। ऐसे में फिर स्वर्ग की जगह नर्क क्यों चलने के लिए कहा जा रहा है। तब यमदूत ने कहा कि एक बार आपने दरवाजें पर भूखे ब्राह्राण को खाली हाथ लौटा दिया था यह उसी पाप का नतीजा है। इसके बाद राजा ने अपने पापों का प्राश्यचित करने के लिए यमदूत से एक वर्ष का समय मांगा और फिर ऋषियों से इस पाप को दूर करने का उपाय पूछा। उनको आज के दिन का व्रत कर ब्राह्मणों को भोजन कराने को कहा गया। ऐसा करने के बाद राजा को विष्णु लोक में स्थान मिला।