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दिवाली 2019: रूप चौदस को क्यों कहा जाता है छोटी दिवाली, जानिए कथा और महत्त्व

Sat, 26 Oct 2019 07:45 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

रूप चौदस पर  यमराज के लिए दीप भी जलाए जाते है।
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हिन्दूओं के त्योहार दिवाली से एक दिन पहले रूप चौदस यानि छोटी दिवाली को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।  ऐसा कहा जाता है कि इस दिन जो व्यक्ति मृत्यु के देवता यमराज पूजा करता है उसको जीवन की सभी परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है। रूप चौदस पर  यमराज के लिए दीप भी जलाए जाते है।
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रूप चौदस की कथा
एक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी असुर नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कराया था तब से इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। वहीं एक दूसरी मान्यता के अनुसार  जब रंती देव नामक राजा के मृत्यु का समय समीप आया तो यमदूत आ खड़े हुए। यमदूत को देखकर राजा बोले मैंने तो अपने जीवन में कभी कोई पाप नहीं किया। ऐसे में फिर स्वर्ग की जगह नर्क क्यों चलने के लिए कहा जा रहा है।  तब यमदूत ने कहा कि एक बार आपने दरवाजें पर भूखे ब्राह्राण को खाली हाथ लौटा दिया था यह उसी पाप का नतीजा है। इसके बाद राजा ने अपने पापों का प्राश्यचित करने के लिए यमदूत से एक वर्ष का समय मांगा और फिर ऋषियों से इस पाप को दूर करने का उपाय पूछा। उनको आज के दिन का व्रत कर ब्राह्मणों को भोजन कराने को कहा गया। ऐसा करने के बाद राजा को विष्णु लोक में स्थान मिला।

 
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रूप चौदस का महत्त्व
इस दिन सुबह स्नान करके यमराज की पूजा और शाम के समय दीप दान करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है।
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