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Rangbhari Ekadashi 2023: रंगभरी एकादशी आज, जानें शुभ मुहूर्त और शिव-गौरी की पूजा विधि

Fri, 03 Mar 2023 12:36 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रंगभरी एकादशी - फोटो : अमर उजाला
Rangbhari Ekadashi Date 2023: आज रंगभरी एकादशी का पर्व मनाया जा रहा है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी मनाई जाती है। इसे आमलकी एकादशी, आंवला एकादशी और आमलका एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। रंगभरी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना के साथ आंवले की पूजा की जाती है। इसके अलावा इस दिन शिव जी की भी पूजा आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इसी एकादशी के दिन भगवान शिव शंकर मां पार्वती को पहली बार काशी में लेकर आए थे। इसलिए यह एकादशी बाबा विश्वनाथ के भक्तों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। रंगभरी एकादशी के पावन पर्व पर भगवान शिव और माता पार्वती को रंग और गुलाल अर्पित किए जाते हैं। साथ ही विधि विधान से पूजा की जाती है। पूजा के बाद बाबा विश्वनाथ मां गौरी के साथ नगर भ्रमण करते हैं। वहीं भक्त शिव-गौरी का स्वागत रंग और गुलाल से करते हैं। इस दिन कशी में अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। ऐसे में चलिए जानते हैं रंगभरी एकादशी की तिथि, पूजा मुहूर्त एवं महत्व...

 
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रंगभरी एकादशी - फोटो : अमर उजाला
रंगभरी एकादशी 2023 तिथि
पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 02 मार्च दिन गुरुवार को सुबह 06 बजकर 39 मिनट से शुरू हो रही है। इसका समापन अगले दिन यानी 03 मार्च दिन शुक्रवार को सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर होगा। उदया तिथि को देखते हुए इस साल रंगभरी एकादशी 03 मार्च दिन शनिवार को मनाई जा रही है।  
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गौना कराकर बाबा विश्वनाथ जब काशी की गलियों में निकले तो भक्तों ने अबीर गुलाल उड़ाकर बाबा का स्वागत किया - फोटो : अमर उजाला
रंगभरी एकादशी पूजन विधि
  • रंगभरी एकादशी के दिन सुबह स्नान करके पूजा का संकल्प लें।
  • घर से एक पात्र में जल भरकर शिव मंदिर जाएं।
  • अबीर, गुलाल, चन्दन और बेलपत्र भी साथ ले जाएं।
  • पहले शिवलिंग पर चंदन लगाएं।
  • फिर बेलपत्र और जल अर्पित करें।
  • इसके बाद अबीर और गुलाल अर्पित करें।
  • भोलेनाथ से अपनी सभी परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना करें।

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रंगभरी एकादशी - फोटो : अमर उजाला
रंगभरी एकादशी का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव यानी बाबा विश्वनाथ माता पार्वती का गौना कराकर रंगभरी एकादशी के दिन पहली बार काशी लेकर आए थे। तब भक्तों ने शिव जी और माता पार्वती का स्वागत रंग और गुलाल से किया था। यही वजह है कि रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा होती है।
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गौना कराकर बाबा विश्वनाथ जब काशी की गलियों में निकले तो भक्तों ने अबीर गुलाल उड़ाकर बाबा का स्वागत किया - फोटो : अमर उजाला
इस तरह मनाई जाती है रंगभरी एकादशी
इस दिन कशी में बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती की पूरे नगर में सवारी निकाली जाती है। लाल गुलाल और फूलों से उनका स्वागत होता है। रंगभरी एकादशी को काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन होता है।
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