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Raksha Bandhan 2022 : रक्षाबंधन कब, भद्राकाल के रहते किस शुभ मुहूर्त में बांधें राखी और क्या है पूजा विधि

Wed, 10 Aug 2022 10:51 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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raksha bandhan 2022 - फोटो : अमर उजाला
रक्षाबंधन 2022
हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस पर्व को श्रावणी पूर्णिमा और राखी के नाम से भी जाना जाता है। रक्षाबंधन बहन-भाई के प्रेम,स्नेह और दुलार का प्रतीक है। यह हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहार में से एक है। इस बार रक्षाबंधन 11 अगस्त, गुरुवार को मनाया जा रहा है। इस बार रक्षाबंधन के त्योहार पर भद्रा का साया रहने वाला है। सावन पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को सुबह 10 बजकर 38 मिनट से आरंभ हो रही है जो अगले दिन यानी 12 अगस्त को सुबह 07 बजकर 05 मिनट तक रहेगी।
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रक्षाबंधन 2022: - फोटो : अमर उजाला
रक्षाबंधन शुभ मुहूर्त

शुभ मुहूर्त- 11 अगस्त को रात 8. 53 मिनट से 9. 45 तक
अभिजीत मुहूर्त- 11. 37 मिनट से 12. 29 मिनट तक
प्रदोष काल मुहूर्त- 08:53 मिनट से 09:14 मिनट तक

भद्राकाल का आरंभ- सुबह 10.38 मिनट से रात 8.25 तक
भद्रा का समापन- 08.51 मिनट पर
भद्रा पूंछ- 05.17 मिनट से 06.18 मिनट तक
भद्रा मुख- 06. 18 मिनट से 08.00 मिनट तक
 
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Raksha Bandhan - फोटो : iStock
रक्षाबंधन का पूजा विधि
बहन-भाई को रक्षाबंधन का इंतजार साल भर से रहता है। आइए जानते हैं रक्षाबंधन के दिन कैसे भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधें आइए जानते है रक्षाबंधन पूजा विधि।

- रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले स्नान करके भगवान की पूजा-आराधना करें और अपने-अपने इष्टदेव को रक्षासूत्र बांधे।
- पूजा के बाद बहनें राखी की थाली सजाएं।
- पूजा की थाली में रोली, अक्षत,कुमकुम, रंग-बिरंगी राखी, दीपक और मिठाई रखें।
-  शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए बहनें भाईयों के माथे पर चंदन, रोली और अक्षत से तिलक लगाएं।
- इसके बाद भाई के दाएं हाथ की कलाई पर रक्षासूत्र बांधे और भाई को मिठाई खिलाएं।
- अंत में बहनें भाई की आरती करते हुए अपने इष्टदेव का स्मरण करते हुए भाई की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करें।

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raksha bandhan 2022 - फोटो : अमर उजाला
रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त 
हिंदू धर्म में कोई भी व्रत-त्योहार,धार्मिक अनुष्ठान और मांगलिक कार्य हमेशा शुभ तिथि,नक्षत्र और मुहूर्त को ध्यान में रखकर किया जाता है। रक्षाबंधन का त्योहार विधि-विधान से अपरान्ह काल में करना सबसे शुभ माना जाता है। इसके अलावा रक्षाबंधन के दिन भद्राकाल का विचार अवश्य ही किया जाता है। रक्षाबंधन के दिन अगर भद्राकाल है उसमें राखी नहीं बांधी जाती है। भद्राकाल को अशुभ समय माना गया है। इसके अलावा इस दिन शुभ मुहूर्त और चौघडिया मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना होता है।

रक्षाबंधन पर भद्रा 
रक्षा बंधन भद्रा मुख: सुबह 06 बजकर 18 मिनट से 08:00 बजे तक
रक्षा बंधन भद्रा काल समाप्त: शाम 08 बजकर 51 मिनट पर
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raksha bandhan 2022 - फोटो : अमर उजाला
चौघडिया शुभ मुहूर्त- 11 अगस्त 2022

शुभ प्रात:   06 -7.39
चर दिन:   10.53- 12.31
लाभ दिन:  12.31- 02.8
अमृत दिन:  02.08- 03.46
शुभ सायं:   05.23- 07.1
अमृत रात्रि:  07.00-08.23
चर रात्रि:   08.23-09.46
वृश्चिक लग्न दिन:01.33- 03.23

रक्षाबंधन 2022 प्रदोष मुहूर्त
प्रदोष मुहूर्त: 20:52 से 21:13 तक
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रक्षाबंधन की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
रक्षाबंधन के दिन इन नियमों का रखें ध्यान
- मुहूर्त शास्त्र के अनुसार अगर पूर्णिमा तिथि पर अपरान्ह काल में भद्रा लगी हुए हो तो रक्षाबंधन का विचार नहीं करना चाहिए। अगर पूर्णिमा अगले दिन तीन मुहूर्तों में हो तो रक्षाबंधन अगले दिन अपरान्ह काल में मनाना चाहिए।
- शास्त्रों के अनुरूप पुरुषों और अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में रक्षासूत्र बांधना चाहिए एवं विवाहित स्त्रियों  के लिए बाएं हाथ में कलावा बांधने का विधान है। 
- रक्षासूत्र बंधवाते समय उस हाथ की मुट्ठी को बंद रखकर दूसरा हाथ सिर पर रखना चाहिए। 
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रक्षाबंधन की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
रक्षाबंधन से जुड़ी कथाएं
शास्त्रों में रक्षाबंधन को मनाए जाने के पीछे कई तरह की पौराणिक कथाओं का वर्णन मिलता है।

कृष्ण-द्रौपदी कथा
रक्षाबंधन को लेकर महाभारत में कृष्ण भगवान और द्रौपदी की बीच एक प्रसंग का वर्णन मिलता है। महाभारत के अनुसार एक बार भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लग गई थी। तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का हिस्सा फाड़कर भगवान श्रीकृष्म की उंगली पर बांधा था। तब भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को हमेशा रक्षा करने का वचन दिया था। तभी से हर वर्ष सावन पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है।

देवी लक्ष्मी और राजा बाली कथा
सावन पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी ने राजा बली की कलाई में रक्षा सूत्र बांधा था। इसके बाद राजा बली ने भगवान विष्णु को वापस बैकुंठ धाम भेजने का वचन दिया था। इसके अलावा इंद्र की पत्नी ने इंद्र को ही राखी बांधी थी और यम को उनकी बहन यमुना ने रक्षा सूत्र बांधी थी।
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Raksha Bandhan - फोटो : iStock
भाई को चंद्र राशि के अनुसार बांधे राखी

मेष राशिः मंगल कामना करते हुए कुमकुम का तिलक लगाएं और लाल रंग की डोरी बांधें। संपूर्ण वर्ष स्वस्थ रहेंगे। 

बृषभः सिर पर सफेद रुमाल रखें और चांदी की या सिल्वर रंग की राखी बांधें।रोली में अक्षत मिला लें। मन शांत और प्रसन्न रहेगा।

मिथुनः हरे वस्त्र से भाई का सिर ढांकें, हरे घागे या हरे रंग की राखी आत्मविश्वास उत्पन्न करेगी। 

कर्कः चंद्रमा जैसे रंग अर्थात सफेद,क्रीम धागों से बनी मोतियों वाली राखी बांधे।

सिंहः गोल्डन रंग या पीली, नारंगी राखी और माथे पर सिंदूर या केसर का तिलक आपके भाई का भाग्यवर्द्धन करेगा। 

कन्याः हरा या चांदी जैसा धागा या रक्षासूत्र करेगा भाई की जीवन रक्षा।

तुलाः शुक्र का रंग फिरोज़ी,सफेद,क्रीम का प्रयोग रुमाल,राखी और तिलक में प्रयोग करें,जीवन में सुख समृद्धि बढ़ेगी।

बृश्चिकः यदि भाई इस राशि के हैं तो चुनिए लाल गुलाबी और चमकीली राखी या धागा और खिलाएं लाल  मिठाई। 

धनुः गुरु का पीताम्बरी रंग भाई की पढ़ाई में लगाएगा चार चांद। बांधिए उन्हें पीली रेशमी  डोरी । 

मकरः ग्रे या नेवी ब्लू रुमाल से सिर ढकें, नीले रंग के मोतियों वाली राखी बचाएगी बुरी नजर से। 

कुंभः  नीले रंग की डोरी से बनी राखी या डोरी भाग्यशाली रहेगी। 

मीनः हल्दी का तिलक ,लाल ,पीली या संतरी रंग की राखी या धागा शुभता लाएगा।
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