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Radha Ashtami 2025: पहली बार रख रहे हैं राधा अष्टमी का व्रत? जानें जरूरी नियम, वरना पूजा हो सकती है निष्फल

Sun, 31 Aug 2025 06:56 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Radha Ashtami Vrat Niyam: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। अगर यह व्रत पहली बार रखा जा रहा है तो पूजा के नियमों और विधियों का सही पालन करना जरूरी होता है।
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radha ashtami vrat niyam - फोटो : amarujala
Radha Ashtami Shubh Muhurat: हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन राधा रानी की विशेष पूजा मध्याह्न में की जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा-पाठ करने से भक्तों को राधा रानी के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण की भी कृपा मिलती है। इसलिए यह पर्व भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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हालांकि, अगर यह व्रत पहली बार रखा जा रहा है तो पूजा के नियमों और विधियों का सही पालन करना जरूरी होता है। बिना सही विधि-विधान के व्रत करने से इसका शुभ फल प्राप्त नहीं हो पाता। इसलिए, पहली बार राधा अष्टमी का व्रत रखने वाले लोगों के लिए कुछ खास बातें जानना बेहद आवश्यक है ताकि वे राधा रानी की विशेष कृपा प्राप्त कर सकें और पूजा सफल हो।
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राधा अष्टमी का व्रत 31 अगस्त, रविवार के दिन रखा जाएगा। - फोटो : freepik
राधा अष्टमी शुभ मुहूर्त
पंचांग की गणना के अनुसार, भाद्रपद मास की शुक्ल अष्टमी तिथि 30 अगस्त की रात 10:46 बजे से शुरू होकर 1 सितंबर की रात 12:57 बजे तक रहेगी। इस वजह से राधा अष्टमी का व्रत 31 अगस्त, रविवार के दिन रखा जाएगा। इस दिन राधा रानी की पूजा करने का सबसे शुभ समय सुबह 11:05 बजे से लेकर दोपहर 1:38 बजे तक माना गया है। इस दौरान पूजा करने से व्रत अधिक फलदायक और प्रभावशाली होता है।
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इस दिन गुस्सा करने, बुरी बातें कहने या बड़ों का अपमान करने से बचना चाहिए। - फोटो : freepik
राधा अष्टमी नियम
  • राधा अष्टमी के दिन कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है ताकि व्रत सफल और फलदायक हो सके।
  • व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठकर नहाना चाहिए और अपने घर और आंगन को अच्छी तरह साफ करना चाहिए।
  • इस दिन गुस्सा करने, बुरी बातें कहने या बड़ों का अपमान करने से बचना चाहिए।
  • इसके अलावा, व्रत के दौरान अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए और केवल एक बार फलाहार करना चाहिए।
  • जो लोग उपवास पूरी तरह से नहीं रख पाते, उन्हें भी इस दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, शराब, प्याज, लहसुन आदि से दूर रहना चाहिए।
  • ये नियम पालन करने से व्रत की पूजा विधि पूरी होती है और राधा रानी की कृपा प्राप्त होती है।
 
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राधा अष्टमी पर क्या करें - फोटो : instagram
राधा अष्टमी पर क्या करें
  • राधा-कृष्ण के युगल स्वरूप की विधिपूर्वक पूजा करें, जिससे उनकी कृपा प्राप्त होती है।
  • राधा रानी की प्रतिमा या तस्वीर को साफ-सुथरे फूलों से सजाएं।
  • उन्हें सुंदर और नए वस्त्र पहनाएं तथा आभूषण से श्रृंगार करें।
  • मालपुआ, मिठाई, रबड़ी और ताजे फलों का भोग अर्पित करें।
  • भोग अर्पित करते समय मंत्र “त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये, गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर” का जप करें।
  • इस मंत्र के साथ अर्पित किया गया भोग जल्दी स्वीकार होता है और पूजा सफल होती है।
  • पूजा करते समय मन को एकाग्र रखें और भक्ति भाव से पूजा करें।
  • राधा अष्टमी के दिन पूजा करने से प्रेम, सौभाग्य और आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति होती है।
  • पूजा के बाद आरती करें और भजन कीर्तन में भाग लें।
  • दिनभर शुद्ध और सात्विक आहार का सेवन करें, फलाहार करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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