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Radha Ashtami 2024: राधा अष्टमी की पूजा में शामिल करें ये पांच चीजें, पूरी होगी हर मनोकामना

Mon, 09 Sep 2024 06:17 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Radha Ashtami 2024: हिंदू धर्म में राधा-कृष्ण की जोड़ी को प्रेम का प्रतीक माना जाता है। उनके प्रेम की कहानियों का उल्लेख आज भी धार्मिक ग्रंथों में देखने को मिलता है। 
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Radha Ashtami 2024 pujan samagri - फोटो : अमर उजाला
Radha Ashtami 2024: हिंदू धर्म में राधा-कृष्ण की जोड़ी को प्रेम का प्रतीक माना जाता है। उनके प्रेम की कहानियों का उल्लेख आज भी धार्मिक ग्रंथों में देखने को मिलता है। मान्यता है कि राधा-कृष्ण की जोड़ी की आराधना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती हैं। लेकिन विशेष कृपा प्राप्ति के लिए भादों माह में उनकी पूजा करनी चाहिए।

भादों माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जहां जन्माष्टमी मनाई जाती है, वहीं इसी माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर राधा अष्टमी होती है। इन दोनों तिथियों पर राधा-कृष्ण की पूजा का विधान है। इस दिन उपवास रखने से जातक को सुख, समृद्धि, धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

इस साल 11 सितंबर 2024 को राधा अष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन प्रीति योग बन रहा है, जो रात 11 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। इस योग में राधा रानी की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है। ऐसे में पूजा को हमेशा संपूर्ण सामग्रियों से करना चाहिए। इसी कड़ी में आइए राधा अष्टमी की पूजा सामग्री के बारे में जान लेते हैं। 
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Radha Ashtami 2024 - फोटो : freepik
पूजन सामग्रियां
  • धूप-दीप
  • खीर
  • फल
  • मिठाई
  • इत्र
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Radha Ashtami 2024 - फोटो : istock
  • अक्षत
  • फूल
  • लाल चंदन
  • सिंदूर

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Radha Ashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला
  • रोली
  • पंचामृत
  • नए वस्त्र
  • फूलों की माला
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Radha Ashtami 2024 - फोटो : अमर उजाला
  • श्रृगांर का सामान 
  • आरती की किताब

यदि आपके पास आरती की किताब नहीं है, तो आप यहां सभी आरती पढ़ सकती हैं।
 

श्री राधा रानी जी की आरती

श्री राधारानी की आरती
आरती राधाजी की कीजै।

कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा।

आरती वृषभानु लली की कीजै। आरती

कृष्णचन्द्र की करी सहाई, मुंह में आनि रूप दिखाई।

उस शक्ति की आरती कीजै। आरती

नंद पुत्र से प्रीति बढ़ाई, यमुना तट पर रास रचाई।

आरती रास रसाई की कीजै। आरती

प्रेम राह जिनसे बतलाई, निर्गुण भक्ति नहीं अपनाई।

आरती राधाजी की कीजै। आरती

दुनिया की जो रक्षा करती, भक्तजनों के दुख सब हरती।

आरती दु:ख हरणीजी की कीजै। आरती

दुनिया की जो जननी कहावे, निज पुत्रों की धीर बंधावे।

आरती जगत माता की कीजै। आरती

निज पुत्रों के काज संवारे, रनवीरा के कष्ट निवारे।

आरती विश्वमाता की कीजै। आरती राधाजी की कीजै ।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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