वैशाख के महीने का दूसरा प्रदोष व्रत मंगलवार, 5 मई यानी आज है। इस बार मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसे मंगल प्रदोष व्रत कहा जाएगा। पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत हर महीने में दो बार होता है, एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। त्रोयदशी तिथि के दिन यह व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन भगवान शिव को माता पार्वती की पूजा का विधान है। आइए, आज जानते हैं इस व्रत का महत्व और पूजा विधि....
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प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव प्रदोषकाल में कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस पावन तिथि पर भोलेनाथ की उपासना करने से वे जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। प्रदोष व्रत में शिव संग शक्ति यानी माता पार्वती की पूजा की जाती है। मंगलवार के दिन किए जाने वाले व्रत को मंगल प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन व्रत करने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है।
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प्रदोष व्रत विधि
नित्य कार्यों से निर्वित होकर स्नान करें।
स्नान करने के बाद भगवान का ध्यान करें और व्रत का संकल्प करना चाहिए।
इस दिन स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।
पूजा के समय उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके बैठना चाहिए।
भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें और उन्हें पुष्प अक्षत्, भांग, धतूरा, सफेद चंदन, गाय का दूध, धूप आदि अर्पित करें।
इस बार लॅाकडाउन की वजह से घर से बाहर जाने की मनाही है, इसलिए अगर आपके घर में शिवलिंग है तो, घर में ही शिवलिंग का अभिषेक करें।
घर में शिवलिंग नहीं है तो भगवान शिव का ध्यान करें।
इस दिन ओम नम: शिवाय का जप करें।
प्रदोष व्रत के दिन शिव चालीसा और आरती भी करनी चाहिए।
भगवान शिव को अपनी इच्छानुसार भोग लगाएं। घर में सात्विक भोजन बना कर भोले शंकर को भोग लगाएं।
पूजा संपूर्ण होने के बाद प्रसाद सभी में बांट दें।
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प्रदोष व्रत पूजा समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत में शाम की पूजा का विशेष महत्व होता है।