फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

12 तरह के होते हैं श्राद्ध, मृत्यु तिथि न हो मालूम तो इस दिन करना चाहिए पितरों का तर्पण

Mon, 24 Sep 2018 07:08 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 5
- फोटो : pitru
24 सितंबर से श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहे हैं। पितृ पक्ष भाद्रपद की शुक्ल चतुर्दशी से आरम्भ होकर आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि तक चलेगा। पितरों को भोजन और अपनी श्रद्धा पहुंचाने का एकमात्र साधन श्राद्ध है। मृतक के लिए श्रद्धा से किया गया तर्पण, पिंड तथा दान ही श्राद्ध कहा जाता है। हमारे पितर हर साल इस तिथि पर अपने जीवित परिजनों को आशीर्वाद देने के लिए धरती पर आते हैं। पितृपक्ष में किए जाने वाले श्राद्ध कई तरह के होते हैं। भविष्य पुराण में श्राद्ध के 12 प्रकार के बारे में बताया गया है। ये हैं नित्य, नैमित्तिक, काम्य, वृद्धि, सपिंडन, पार्वण, गोष्ठी, शुद्धयर्थ, कर्मांग, दैविक, यात्रार्थ और पुष्टयर्थ।
विज्ञापन

2 of 5
नित्य श्राद्ध- पितृपक्ष के पूरे दिनों में हर रोज जल, अन्न, दूध और कुश से श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं।

नैमित्तिक श्राद्ध-  माता-पिता की मृत्यु के दिन यह श्राद्ध किया जाता है। इसे एकोदिष्ट कहा जाता है।

काम्य श्राद्ध- यह श्राद्ध विशेष सिद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

वृद्धि श्राद्ध- सौभाग्य और सुख में कामना कामने के लिए वृद्धि श्राद्ध किया जाता है।
विज्ञापन

3 of 5
सपिंडन श्राद्ध- यह श्राद्ध मृत व्यक्तियों को 12वें दिन किया जाता है। इसे महिलाएं भी कर सकती है।

पार्वण श्राद्ध- इस श्राद्ध को पर्व की तिथि पर किया जाता है। इसलिए इसे पार्वण श्राद्ध कहा जाता है।

गोष्ठी श्राद्ध- जो श्राद्ध परिवार के सभी सदस्य मिलकर करते हैं उसे गोष्ठी श्राद्ध कहा जाता है।

शुद्धयर्थ श्राद्ध- पितृपक्ष में किया जाने वाले यह श्राद्ध परिवार की शुद्धता के लिए किया जाता है।

4 of 5
कर्मांग श्राद्ध- किसी संस्कार के मौके पर किया जाने वाले श्राद्ध कर्मांग श्राद्ध कहलाता है।

तीर्थ श्राद्ध- किसी तीर्थ पर किये जाने वाला श्राद्ध तीर्थ श्राद्ध कहा जाता है।

यात्रार्थ श्राद्ध- जो श्राद्ध यात्रा की सफलता के लिए किया जाता है उसे याश्रार्थ श्राद्ध कहा जाता है।

पुष्टयर्थ श्राद्ध- जो  श्राद्ध आर्थिक उन्ननि के लिए किए जाते हो इसे पुष्टयर्थ श्राद्ध कहा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
अगर किसी को अपने परिजन की मृत्यु की तिथि सही-सही मालूम ना हो तो इसका श्राद्ध अमावस्या तिथि को किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें